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Showing posts from August, 2022

विभाजन की विभीषिका को बार-बार याद किया जाना चाहिए- डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी

“चाणक्य” जैसे लोकप्रिय टीवी धारावाहिक और “पिंजर” जैसी संवेदनशील फिल्म के निर्देशक डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने कहा कि विभाजन की विभीषिका को बार-बार इसलिए याद करना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसा न हो। 1947 के बाद इसकी पहल हर साल होनी चाहिए थी। अभी भी बहुत सारे घाव भरे नहीं हैं। उन्होंने कहा, विभाजन की त्रासदी पर जिस तरह से फिल्में बननी चाहिए थीं, सीरियल बनने चाहिए थे, नाटक बनने चाहिए थे, नहीं बने। हम डरते रहे। इतिहास मानव सभ्यता

तकनीक की दिशा में नए आयाम स्थापित करने की दिशा में आज़ादी के पर्व पर लांच की गयी युवाओं के लिए प्रभावी कैंपेन

जयपुर बेस्ड टेक्नोलॉजी गुरु ने लांच की यह कैंपेन जिसका उदेश्य तकनीकी एजुकेशन और सिस्टम डिज़ाइन की लर्निंग को सरल बनाना है ताकि युवा इसका सीधा फायदा उठा सके।  

दीपों का त्योहार दीपावली

भारत त्योहारों का देश है। यहाँ अनेक त्योहार मनाए जाते हैं, जैसे-होली, दीपावली, दशहरा, रक्षाबंधन, ईद, क्रिसमस आदि। इनमें से दीपावली का त्योहार अत्यंत पवित्र एवं उल्लासपूर्ण होता है।

रक्षाबंधन

राखी के पावन धागों में छिपा बहन का पावन प्यार। भगिनी की रक्षा का बंधन है रक्षाबंधन त्योहार ॥  भारत के त्योहारों में रक्षाबंधन का अपना विशेष महत्व है। यह त्योहार भाई को बहन के प्रति उसके कर्तव्य की याद दिलाता है। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन यह त्योहार मनाया जाता है. इसीलिए इसे 'श्रावणी' भी कहा जाता है।

बुलेट ट्रेन

भारत में 16 अप्रैल, 1853 को 33.81 किलोमीटर लंबे मार्ग पर मुंबई से ठाणे के बीच 8 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से पहली रेलगाड़ी चलाई गई थी, किंतु आज भारत के रेल नेटवर्क ने न सिर्फ़ वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, बल्कि विश्व के 5 बड़े रेल नेटवर्कों में इसका स्थान है। कर्मचारियों की वृहत संख्या के आधार पर 1.307 मिलियन कर्मचारी वाली भारतीय रेल विश्व की नौवीं सबसे बड़ी व्यावसायिक संस्था है। भारत में रेल यातायात को तीव्र गति प्रदान करने के लिए बुलेट ट्रेन की योजना पर विचार किया गया।

भोजन में सलाद की महिमा

कुछ बरस पहले जब महंगाई की मार इस कदर नहीं हुआ करती थी, तब सलाद की प्लेट मुफ्त में ग्राहक को पेश की जाती थी। इस सलाद में प्याज और टमाटर के गोलाकार पतले टुकड़े के साथ एक-दो हरी मिर्च और आधा-चौथाई नींबू ही यथेष्ट समझा जाता था। बड़े रेस्तराओं और घरों में भी सलाद इससे ज्यादा अलग नहीं होता था, मूली-गाजर के साथ खीरे की कुछ फाँक भी उसमें दिख जाती थी। मजेदार बात यह है कि इसे हरा सलाद कहा जाता था, जबकि इसमें हरी धनिया पत्ती नाममात्र को ही होती थी।

प्रदूषण

'प्रदूषण' शब्द का अर्थ है-वायुमंडल या वातावरण का दूषित होना। प्रदूषण की समस्या आज सारे विश्व के सामने विकराल रूप धारण करती जा रही है। आज प्रदूषण की समस्या ने संसार के समस्त प्राणियों के स्वास्थ्य के आगे एक प्रश्नचिह्न लगा दिया है। प्रदूषण चार प्रकार का हो सकता है-प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण तथा भूमि प्रदूषण वायुप्रदूषण का प्रकोप सबसे अधिक महानगरी पर हुआ है।

एकता

मनुष्य के जीवन में एकता का बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। हम सभी जानते हैं कि एकता में शक्ति है और एकता के बल पर हम बड़े-बड़े कार्य सरलता से कर सकते हैं। जैसा कि हम सभी यह भी जानते हैं कि हमारे देश भारत को आपसी फूट के कारण बहुत नुकसान हुआ और सभी का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया।

पुस्तक की आत्मकथा

मेरे जन्म की कहानी बड़ी विचित्र है। मैं आज जो कुछ भी हैं, मानव के कारण हैं। मानव की तपस्या, लगन तथा परिश्रम का ही फल है कि आज मैं इस रूप में आपके सामने हैं। जन्म से पूर्व में केवल सूक्ष्म विचारों और ज्ञान के रूप में थी। एक दिन मेरे स्रष्टा की तपस्या सफल हुई और मैंने भी उसकी साधना पर प्रसन्न होकर उसकी

प्रातः काल की सैर

प्रातःकाल में उगते हुए सूर्य की लालिमा, चिड़ियों की चहचहाहट और शीतल मंद सुगंधित समौर हमारे शरीर और आत्मा को अपनी मधुरता से भर देती है। एक नई उमंग एवं उल्लास से मन प्रफुल्लित एवं उत्साहित होकर नए दिन की तैयारी में लग जाता है। कहा भी गया है कि अगर दिन की शुरुआत अच्छी हो, तो पूरा दिन भी

गोरखा समुदाय दार्जलिंग में बनाएगा वॉर मेमोरियल

केंद्रीय अल्पसंख्यक राज्य मंत्री जॉन बरला ने भरोसा दिलाया है कि दार्जिलिंग में गोरखा मेमारियल पार्क बनाने और गोरखा समुदाय की हित रक्षा की दिशा में हरसंभव सहायता दी जायेगी। वे यहां गोरखा प्राइड मिशन के कार्यक्रम में भाग ले रहे थे। उन्होंने मिशन की वेबसाइट को भी लांच किया। भारतीय फुटबॉल टीम के कैप्टन सुनील क्षेत्री को भी इसमें आना था लेकिन व्यस्तता की वजह से नहीं आ सके और शुभकामना संदेश भेजा।

महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण का तात्पर्य है महिलाओं को उनके जीवन एवं कार्य क्षेत्र में निर्णय लेने का अधिकार होना। उन्हें व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक एवं कानूनी सभी क्षेत्रों में समान अधिकार प्रदान करना। महिला सशक्तिकरण आजकल एक बहुचर्चित मुद्दा है और महिलाएं आपनी पूरी क्षमता का एहसास करने के दिशा में अग्रसर हैं ।

दूरदर्शन

आधुनिक युग वैज्ञानिक युग है। विज्ञान ने मनुष्य को नए-नए आविष्कार उपहारस्वरूप दिए हैं। दूरदर्शन उन्हीं वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है, जिसके द्वारा हम घर बैठे हर प्रकार का मनोरंजन प्राप्त कर लेते हैं। दूरदर्शन पर हम केवल नाचने-गानेवालों को सुन ही नहीं सकते, वरन् उन्हें प्रत्यक्ष देख भी सकते हैं।

एक बेबस बेटी

एक लड़की थी जिसका नाम पूनम था। वह अपने पिता श्यामलाल के साथ रहती थी। जब वह छोटी थी तब उसको माँ गुजर गई थी। इसीलिए पूनम और उसके पिता श्यामलाल एक छोटे से घर में रहते थे। पूनम एक अच्छी बेटी तो थी मगर श्यामलाल एक अच्छा पिता नहीं था। वह सिर्फ नाम का ही पिता था, मगर असल में वो एक नम्बर का जुआरी और शराबी आदमी था।

दशहरा

जब राम ने रावण को मारा, है उसी विजय की शान दशहरा।। हुई धर्म की जय अधर्म पर, शक्ति की पहचान दशहरा ।। भारतवर्ष की पावन धरती पर अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। ये त्योहार हमें अपनी संस्कृति का ज्ञान कराते हैं तथा इनमें से कुछ ऐसे भी हैं, जिनसे हमें अनुभव होता है कि धर्म की

चलचित्र

मनोरंजन मानव जीवन को आवश्यकता है। मनुष्य जब दिन भर की भाग-दौड़ से थक जाता है, तो उसे किसी-न-किसी प्रकार का मनोरंजन चाहिए, जो उसकी थकान मिटाकर उसे पुन: तरोताजा कर दे। ऐसे में सिनेमा या चलचित्र आज के युग में मनोरंजन का सर्वाधिक लोकप्रि साधन है।

विज्ञान से लाभ-हानि

आधुनिक युग को 'विज्ञान का युग' कहा जाता है। आधुनिक जीवन में विज्ञान ने हर क्षेत्र में अद्भुत क्रांति उत्पन्न कर रखी है। इसने हमारे जीवन को सहज व सरल बना दिया है। विज्ञान ने मानव की सुख-सुविधा के अनेक साधन जुटाएँ हैं। टेलीफ़ोन, टेलीविजन, सिनेमा, वायुयान, टेलीप्रिंटर आदि विज्ञान के ही आविष्कार हैं। विद्युत के

समाचार-पत्रों का महत्व

व्यक्ति और समाज एक-दूसरे से जुड़े हैं। समाज के बारे में पूरी जानकारी पाने के लिए सस्ता व सरल साधन है-समाचार-पत्र। सुबह उठते ही प्रत्येक व्यक्ति समाचार पत्र पढ़ना चाहता है। समाचार पत्र के बिना दिन अधूरा-अधूरा सा प्रतीत होता है। अधिकतर लोग समाचार-पत्र पढ़कर ही घर के अन्य कार्य शुरू करते हैं।

मेरे जीवन की अभिलाषा

प्रत्येक मनुष्य के मन में अनेक इच्छाएँ उमड़ती रहती हैं। इन्हीं इच्छाओं के कारण हर इंसान जीवन में अपने लक्ष्य के बारे में कुछ-न-कुछ निर्णय लेता है। हर व्यक्ति चाहता है कि वह जीवन में कुछ ऐसा कार्य करे, जिससे समाज में उसका सम्मान हो, उसके परिवार का नाम हो। जब मैंने भी अपने लक्ष्य के बारे में सोचा, तो मेरे मन में अनेक विचार आए। लेकिन काफी सोच-विचार कर मैंने अध्यापन कार्य करने का निश्चय किया है।

वर्षा ऋतु: 'ऋतुओं की रानी'

पृथ्वी की प्यास बुझाने, गरमी से तपे हुए मनुष्यों, पशु-पक्षियों और जीव-जंतुओं को शीतलता देने वाली जो ऋतु है, वह है- वर्षा ऋतु। वर्षा ऋतु आषाढ़ से शुरू होकर भादों के अंत तक रहती है। प्रायः 15 जुलाई से 15 सितंबर तक वर्षा के दिन होते हैं। सूर्य की किरणें जब समुद्र के जल पर पड़ती हैं, तो पानी भाप बनकर उड़ जाता

विद्यालय का वार्षिकोत्सव

उत्सव मनुष्य के जीवन में आनंद और हर्ष का संचार करते हैं। विद्यालय का वार्षिकोत्सव विद्यार्थियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है। यही वह अवसर है जब विद्यार्थी अपनी-अपनी प्रतिभाओं को दिखा सकते हैं। विद्यालय का यह उत्सव प्रायः दिसंबर मास के आस-पास मनाया जाता है। इसकी तैयारी एक महीने पूर्व ही प्रारंभ हो जाती है। इस उत्सव में विद्यालय के सभी छात्र-छात्राएँ तथा अध्यापक अध्यापिकाएँ अपना-अपना योगदान देते हैं।

साइबर योद्धा बनकर मिशन मोड में काम करना होगा: इंद्रेश कुमार

जिस समाज या देश को अपराध से लड़ना है, वह किसी भी सूचना की अनदेखी नहीं कर सकता है। अगर हम हर सूचना पर तत्परतापूर्वक काम करेंगे तभी साइबर अपराध जैसी बड़ी चुनौती से निपटा जा सकेगा। साइबर क्राइम से लड़ने के लिए उपभोक्तावाद में नहीं मिशन मोड में जीना होगा। अगर श्रीलंका मिशन मोड में जी रहा होता तो वह दिवालिया नहीं हुआ होता।

ईमानदारी की श्रेष्ठता

अजीब स्वभाव है मानव का! हमारी भले ही ईमान से जान पहचान ना हो,पर हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति ईमानदार हों।व्यापार में, व्यवहार में , साहित्य में , या संसार में सभी जगह इमानदारी की मांग है। मालिक चाहता है कि उसका नौकर ईमानदार हो। प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि उसके साथी ईमानदार मिले। पर क्या खुद को कभी टर्टोलेंगे।बेईमान लोग तो काले धन पर होने वाले सर्जिकल स्ट्राइक से भी अध से हो जाते हैं परंतु ईमानदार लोग ऐसे फैसले से लाभ प्राप्त करते हैं।

परीक्षा भी एक मुसीबत

तीन अक्षर के नाम 'परीक्षा' को सुनते ही सभी को अपनी नानी याद आ जाती है तथा इस नाम को सुनते ही बड़े-बड़े भयभीत हो जाते हैं। जैसे सोने की शुद्धता को कसौटी पर परखा जाता है तथा उसे शुद्ध करने के लिए अग्नि में तपाया जाता है, वैसे ही विद्यार्थियों की योग्यता की कसौटी भी 'परीक्षा' है।

घर में रखने योग्य मूर्तियां...

हिंदू धर्म के अनुसार घर में सभी देवी-देवताओं के लिए एक अलग से ही स्थान बनाया जाता है। हिंदू धर्म में जैसे-जैसे देवताओं के लिए स्थान बता रखे हैं लोगों ने वैसे ही अपने घरों में देवताओं को स्थापित किया है आप सभी के घर में ही देवी-देवताओं का मंदिर तो जरूर होगा । सबसे पहले आपको बता दें कि घर के मंदिर को हमेशा ही

मन के नियंत्रण का अभ्यास

भारतवर्ष में जितने भी धर्म या संप्रदाय पैदा हुए हैं, इन सब का एक ही सिद्धांत है कि मनुष्य का मन बहुत चंचल है, चंचलता दूर करके उसका एकाग्र करना बहुत आवश्यक है। बिना मन की  एकाग्रता कि किसी भी क्षेत्र में मनुष्य को सफलता प्राप्त नहीं हो सकती। चित्त की वृत्तियां अनेक है, चित्त की उन सब वृत्तियों को एकाग्र करने से ही

विष्णु भक्त नारद मुनि

भगवान विष्णु के परम भक्त नारद ब्रह्मा जी के पुत्र हैं।उन्होंने भगवान विष्णु की भक्ति और तपस्या की । नारद जी पर देवी सरस्वती की भी कृपा थी। जिससे उन्हें हर तरह की विद्या में महारत हासिल थी। महाभारत के सभा पर्व के पांचों अध्याय में नारद जी का व्यक्तित्व के बारे में बताया गया है कि देवर्षि नारद वेद और उपनिषद के मर्मज्ञ ,  देवताओं के पूज्य ,  इतिहास व पुराणों के विशेषज्ञ ,  ज्योतिषी के प्रखंड विद्वान और सर्वत्र गति वाले हैं । यानी वह हर लोक में प्रवेश कर सकते हैं , इसीलिए इन्हें देवताओं की ऋषि यानी देव ऋषि का भी पद मिला हुआ है।

आधुनिक दौर का भोजन एवं उससे बीमारियां

अपनी और बच्चों की बढ़ी हुई प्रतिरोधक क्षमता ही कोरोना  से बचाव का मुख्य आधार है। ऐसे में खानपान पर ध्यान देना काफी जरूरी है खासकर बच्चों के आहार पर। आजकल फ्रेंच फ्राइस, पोटैटो चिप्स, समोसा, कूकिस, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक्स, केक व पिज़्ज़ा बच्चों का मनपसंद भोजन बना हुआ है, परन्तु इस प्रकार के खाद्य पदार्थों के बढ़ते प्रचलन ने बच्चों को पोषक तत्वों से दूर रखा हुआ है।

अच्छे स्वास्थ के लिए उचित आहार

मनुष्य का स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर होता है कि उसका आहार कैसा है। यदि आहार संतुलित हो तो बेहतर है परंतु यदि आपकी शरीर में किसी तत्व की कमी है तो संतुलित आहार भी उसके लिए उचित आहार नहीं होगा, अतः आपके शरीर की जरूरतों के मुताबिक आपको आहार लेना चाहिए। विदेशों में परामर्श के लिए डाइटिशियन होते हैं जो डॉक्टर के भांति स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करते हैं परंतु भारत में इस समय केवल बड़े हॉस्पिटल में ही आहार विशेषज्ञ होते हैं। स्वतंत्र प्रैक्टिस करने वाले आहार विशेषज्ञ केवल महानगरों में ही है। अगर आप डाइट के बारे किसी आम आदमी से पूछे तो उत्तर होगा कि पेट भर के खाओ और ठीक से पच जाए तो वही सही आहार है।अगर आप पूछे कि मोटापा कम करना है तो सीधा साधा उत्तर मिलेगा कि कम खाओ और काम दबाकर करो। अपने आप वजन कम हो छरहरा होना या बिना कमजोरी के वजन कम करना उतना आसान नहीं है जितना आसान है प्रतीत होता है फिर भी यह कार्य कठिन भी नहीं है। यह सदैव याद रखिए प्रत्येक मनुष्य की शारीरिक क्षमता, पाचन शक्ति व जीवनशैली का भी आहार से सीधा संबंध होता है अतः आहार का चुनाव करते समय इस बात का सदैव ध्यान रखें। 1. प्रोटीनयुक्त

संगति का प्रभाव

'जैसी संगति बैठिए तैसोई फल होत' यह कहावत जीवन का सत्य है। मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। समाज की इकाई होने के कारण मनुष्य एक-दूसरे पर निर्भर रहता है। हर व्यक्ति किसी-न-किसी रूप में दूसरे की सहायता अवश्य करता है।

समय का सदुपयोग

इस संसार में सभी चीजों को घटाया बढ़ाया जा सकता है, पर समय को नहीं। समय किसी के अधीन नहीं रहता। न वह रुकता है, न ही वह किसी की प्रतीक्षा करता है। काल करे सो आज कर, आज करें सो अब, पल में परलै होएगी, बहुरि करोगे कब

प्रदूषण

आधुनिक युग विज्ञान का युग है। विज्ञान ने जहाँ हमें सुख सुविधा के साधन दिए हैं, वहाँ दूसरी ओर भयानक चीज भी दी है। पर्यावरण का घातक परिवर्तन प्रदूषण कहलाता है। प्रदूषण मनुष्य की गतिविधियों का अवहित प्रदूषण जैसी प्रभाव है जो कि वह भौतिक वातावरण में उपस्थित कर देता है। जनसंख्या वृद्धि तथा पदार्थों के दुरूपयोग के कारण प्रदूषित गैसें वायुमंडल में एकत्रित हो जाती हैं और प्राणियों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है।