भारत का ऊर्जा परिदृश्य 2025: टिकाऊ ऊर्जा के साथ विकास की रफ्तार

भारत ने जून 2025 तक अपने ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति दर्ज करते हुए 476 गीगावाट कुल स्थापित बिजली क्षमता प्राप्त कर ली है। इसमें तापीय ऊर्जा 240 GW (50.5%), सौर ऊर्जा 110.9 GW, पवन ऊर्जा 51.3 GW, जलविद्युत 48 GW, जैव ऊर्जा 11.6 GW, तथा परमाणु ऊर्जा 8.8 GW शामिल है। इस मिश्रण में गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों का योगदान 235.7 GW हो चुका है, जो कुल क्षमता का लगभग 49% है, इनमें से 226.9 GW

नवीकरणीय और 8.8 GW परमाणु क्षमता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि यह लक्ष्य 2030 से पाँच साल पहले हासिल करना भारत की दृढ़ नीति प्रतिबद्धता दर्शाता है।

प्रमुख उपलब्धियाँ
-बिजली की कमी मात्र 0.1% रह गई— वर्ष 2013-14 में यह 4.2% थी।
-2.8 करोड़ से ज़्यादा घरों तक बिजली पहुंची;
-प्रति व्यक्ति बिजली खपत में 45.8% का इज़ाफा;
-2015-16 में 305 GW से बढ़कर 2025 में क्षमता 475 GW तक पहुँची।

नवीकरणीय ऊर्जा में तेज़ बढ़त

भारत की सौर शक्ति पिछले दशक में 39 गुना बढ़ी है (2014 में 2.82 GW, 2025 में 110.9 GW)। अकेले वित्त वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड 23.8 GW नई सौर क्षमता जोड़ी गई। पवन ऊर्जा क्षेत्र में, क्षमता 2014 में लगभग 21 GW से बढ़कर 2025 में 51.3 GW हो गई— भारत इस क्षेत्र में दुनिया में चौथे स्थान पर है।

संयुक्त रूप से, नवीकरणीय स्रोतों से ऊर्जा उत्पादन कुल बिजली उत्पादन का लगभग 22% हो गया है, जो 2014-15 में 17% था।

गैर-नवीकरणीय ऊर्जा और संधारणीयता
कोयला अब भी बिजली उत्पादन में सबसे अधिक योगदानकर्ता है— 219 GW की क्षमता के साथ। सरकार ने कोयले की आयात निर्भरता घटाते हुए, नई नीतियों और उत्पादन में नवाचार के बल पर रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन दर्ज किया है। साथ ही, हरित हाइड्रोजन, जैव ईंधन और कार्बन कटौती के विभिन्न मिशन शुरू किए गए हैं।

रिफॉर्म और योजनाएँ
-पीएम सूर्य घर योजना: 1 करोड़ परिवारों के लिए छत पर सोलर, 30 GW क्षमता का लक्ष्य।
-पीएम-कुसुम: किसानों हेतु ग्राउंड-माउंटेड सौर ऊर्जा व सोलर पंप।
-राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन: 2030 तक 5 MMT हरित हाइड्रोजन उत्पादन, 100 GW RE क्षमता का लक्ष्य।
-सौर पार्क, PLI योजना: बड़े पैमाने पर सौर विनिर्माण व निवेश।

वैश्विक भूमिका और लक्ष्य

भारत आज अक्षय ऊर्जा क्षमता में विश्व में चौथे, सौर ऊर्जा में तीसरे, व पवन ऊर्जा में भी चौथे स्थान पर है। IEA के अनुसार, अगले वर्षों में वैश्विक बिजली मांग में 85% वृद्धि उभरती अर्थव्यवस्थाओं से आएगी, जिसमें भारत की साझेदारी सबसे अहम होगी।

भविष्य की दिशा
सरकारी रिपोर्टों में संकेत है कि भारत 2030 तक अपनी ऊर्जा क्षमता में नवीकरणीय हिस्सेदारी को 25-30% तक और बढ़ाएगा, जबकि ऊर्जा मांग में सालाना 5% की बढ़ोतरी अनुमानित है।

भारत का ऊर्जा क्षेत्र अब स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और समावेशी विकास के संतुलन की मिसाल बनता जा रहा है। नीति हस्तक्षेप, टेक्नोलॉजी निवेश और नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर के कारण भारत न सिर्फ खुद की जरूरतें पूरी कर रहा है, बल्कि वैश्विक जलवायु लक्ष्यों में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

सोर्स पीआईबी

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