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मजदूर और इंसानियत

आजकल अधिकतर समय सोशल मीडिया पर ही बीतता है। टीवी पर इतनी नकारात्मक खबरें दिखायी जा रही है कि देखने का मन ही नहीं करता। किताबों के एक-दो पन्ने पढ़ना भी बहुत भारी लगता है। ऐसे में हर समय नजरें फेसबुक पर ही लगी रहती है। कल एक तस्वीर देखी और फिर मैं उसे देखती ही रह गयी। एक गरीब मजदूर पैदल अपने गांव लौट रहा था। उसकी पीठ पर सामान लदा था। मगर, एक हाथ में एक कुत्ता था और दूसरे हाथ में एक बत्तख। इस विपत्ति की घड़ी में जहां खुद उसके घर पहुंचने का कोई ठिकाना नहीं है, ऐसे में भी उसने उन असहाय जानवरों को अकेला नहीं छोड़ा। वह चाहता तो इन जानवरों को वहीं छोड़ देता, वे बेचारे क्या कर लेते, लेकिन जिन जानवरों को हम पालते हैं, हमें उनसे कितना लगाव हो जाता है, यह तस्वीर इस बात की गवाही दे रही थी। इसे ही मानवीयता कहते हैं।
ऐसे बहुत से चित्र आंखों में बस जाते हैं और अक्सर याद आते हैं। कुछ साल पहले बिहार में आयी बाढ़ का एक दृश्य टीवी पर देखा था। एक लड़का नदी के पानी में गले तक डूबे था। उसके सिर पर एक टोकरी थी और उसमें एक बकरी का बच्चा बैठा था। वह बार-बार उस बच्चे को हाथ से छूकर देख रहा था कि वह सही सलामत तो है। इसी तरह एक दूसरा आदमी अपनी गाय की रस्सी पकड़े बहते तख्त पर खडा था। एक दूसरे लड़के ने अपने गले में एक थैला लटका रखा था, और उसमें से बिल्ली की आंखे दिखायी दे रही थी। ऐसे न जाने कितने दृश्य भी हैं, जिन्हे देखकर आंख भर आती हैं।

केरल के एक अखबार ने दो विपरीत दिशाओं में जानेवाली बसों का एक चित्र छापा था। वह इतना अद्भुत चित्र था कि उसे बार-बार देखने का मन करता है। इसमें एक बच्चा दूसरी बस में बैठे बच्चे को एक केला पकड़ा रहा है। अखबार ने बताया था कि वह बच्चा भूखा था। जब उसने दूसरी बस में बैठे बच्चे के हाथ में केला देखा तो मांगने लगा और केले वाले बच्चे ने उस बच्चे को केला देने में जरा सी भी देरी नहीं की। न जान न पहचान, लेकिन बच्चे भी जानते हैं कि किसी जरूरतमंद की मदद कैसे की जाती है। मुसीबत में शायद हम एक दूसरे के अधिक करीब हो जाते हैं। एक-दूसरे को बचाने की धारणा और मजबूत हो जाती है।

एक जगह लिखा था-जरा ठहरे, खाना खायें और पानी पियें। उतराखण्ड की एक तस्वीर में आगे-आगे तेंदुआ जा रहा है और पीछे-पीछे मजदूर आ रहे हैं। वे मजदूर सिर्फ घर जाना चाहते हैं। घर के आकर्षण ने उनके भीतर के तेंदुए के भय भी खत्म कर दिया है। ऐसी न जाने कितनी बाते हैं, जो बेहद निराशा भरे दिन में भी इंसान और इंसानियत पर हमारा भरोसा और मजबूत करती है।

सड़कों पर जो मजदूर विषम परिस्थितियों में घर की ओर चलते देखे गये, उनको नेताओं, अधिकारियों, मीडिया के पांच सितारा वाले पत्रकारों ने क्यों नहीं देखा? उनकी व्यथा कवर करनेवाले मीडियाकर्यो ने अपनी रिपोर्ट दाखिल करने के बाद अपने प्रभाव और संपर्को का इस्तेमाल कर इन मजदूरों की मदद करना क्यों जरूरी नहीं समझा? क्योंकि ऐसे ही संकट काल में पता चलता है कि समाज के घटकों का रंग लाल है या सफेद।

-भावना भारती

एमिटी यूनिवर्सिटी
कोलकाता

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अच्छे स्वास्थ्य के लिए उचित आहार

मनुष्य का स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर होता है कि उसका आहार कैसा है। यदि आहार संतुलित हो तो बेहतर है, परंतु यदि शरीर में किसी तत्व की कमी है तो संतुलित आहार भी उसके लिए उचित आहार नहीं होगा। इसके लिए आपको शरीर की जरूरतों के मुताबिक आहार लेना चाहिए।

विदेशों में परामर्श के लिए डाइटिशियन होते हैं जो डॉक्टर के भांति स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करते हैं, परंतु भारत में इस समय केवल बड़े हॉस्पिटल में ही आहार विशेषज्ञ होते हैं। स्वतंत्र प्रैक्टिस करने वाले आहार विशेषज्ञ केवल महानगरों में ही है।

अगर आप डाइट के बारे किसी आम आदमी से पूछे तो उत्तर होगा कि पेट भर के खाओ और ठीक से पच जाए तो वही सही आहार है। अगर आप पूछे कि मोटापा कम करना है तो सीधा-साधा उत्तर मिलेगा कि कम खाओ और दबाकर काम करो। अपने आप वजन कम हो, छरहरा होना या बिना कमजोरी के वजन कम करना उतना आसान नहीं है, जितना आसान प्रतीत होता है, फिर भी यह कार्य कठिन भी नहीं है। प्रत्येक मनुष्य की शारीरिक क्षमता, पाचन शक्ति और जीवनशैली का भी आहार से सीधा संबंध होता है। इसलिए आहार का चुनाव करते समय इस बात का सदैव ध्यान रखें।।
1. प्रोटीनयुक्त भोजन करें: प्राय…

कोरोना वायरस को भगाने के लिए ऐसे बढ़ाएं अपनी शक्ति

कोरोना वायरस से बचने के लिए जितना जरूरी लॉकडाउन है, उससे ज्यादा जरूरी है इस दौरान खान-पान का ध्यान रखना। प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए डॉक्टर पौष्टिक आहार की सलाह दे रहे हैं। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉक्टर एके सिंह ने बताया कि आयुष मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश को अगर लोग मान ले तो निश्चित तौर पर लोगों की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत मजबूत होगी। उन्होंने अपील की है कि लोग लॉकडाउन का पालन जरूर करें ।

आयुष मंत्रालय की सलाह-
1. पूरे दिन गर्म पानी पीते रहे।
2. नियमित रूप से कम से कम 30 मिनट तक योगासन, प्राणायाम और ध्यान करें।
3. घर में मौजूद हल्दी, जीरा, धनिया और लहसुन आदि मसालों का इस्तेमाल भोजन बनाने में जरूर करें।
4. जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम है, वह चवनप्राश का सेवन करें।
5. तुलसी, दालचीनी, कालीमिर्च, सोंठ पाउडर और मुनक्के (नहीं है तो सूखी अदरक को पीसकर चूर्ण बना लें) से बनी काली चाय को दिन में एक से दो बार पिएं।
6. चाय में चीनी के बजाय गुड़ का उपयोग करें। इससे बेहतर बनाने के लिए नींबू के रस भी मिला सकते हैं।
7. सुबह और शाम दोनों नथुनों में तेल या नारियल का तेल या फिर घी लगाए।

अभिनेता ऋषि कपूर को श्रद्धांजलि

फिल्म अभिनेता ऋषि कपूर का 30 अप्रैल को मुंबई में कैंसर से निधन हो गया। बुधवार को सांस लेने में तकलीफ की वजह से उन्हें मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। ऋषि‌ कपूर पिछले साल सितंबर महीने में न्यूयॉर्क से कैंसर का इलाज कराके मुंबई लौटे थे।

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