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 दिल्ली का अपना कविता और शायरी का उत्सव: दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल सीज़न 6

दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल ऐतिहासिक शहर दिल्ली के सांस्कृतिक और काव्य विरासत को बचाने, पुनर्जीवित करने और उसका जश्न मनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस साल दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल चार अलग-अलग भाषाओं- हिंदी, उर्दू, पंजाबी और अंग्रेज़ी में ख़ास अंदाज़ में शायरी और कविता का जश्न मनाएगा। अन्य भारतीय भाषाओं के कवि भी कविता और शायरी को समर्पित इस इकलौते उत्सव में भाग लेंगे। इस कविता उत्सव में कविता के इर्द-गिर्द होने वाली चर्चाओं पर रौशनी डालने के लिए कई वक्ता मौजूद होंगे, आपका मन मोह लेने के लिए कई कलाकार मौजूद होंगे और कवितायेँ और शायरी ऐसी होंगी जो आपके रूह में उतर जाएंगी।


इस उत्सव की शान को पिछले 5 संस्करणों में विभिन्न प्रतिष्ठित कवियों और वक्ताओं द्वारा क़ायम रखा गया है। दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल का नज़रिया है के इस उत्सव को साल दर साल और शानदार बनाया जाए। कोरोना महामारी ने हमारी दुनिया को अविश्वसनीय तरीके से हमेशा के लिए बदल के रख दिया है। और इस बदलाव का कविता के इस उत्सव में ध्यान रखा गया है। दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल में पहले से कहीं ज़्यादा प्रासंगिक, ठोस और दार्शनिक विचार और कार्यक्रम पेश किये जाएंगे जिनका असर इस उत्सव के 2 दिन के जश्न के बाद भी आप पर क़ायम रहेगा।

दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल की घोषणा करते हुए इस महोत्सव  की संस्थापक और अध्यक्षा डॉली सिंह ने कहा, "दिल्ली हमेशा ही कवियों और शायरों की भूमि रही है। यहाँ की गलियों में आज भी ख़ुसरो, ग़ालिब और ज़फर की शायरी गूंजती है। कविता और शायरी करना इंसान का स्वभाव है। इससे राहत मिलती है और हमारे ख़यालों पर इसका असर आता है। इसमें हैरत की कोई बात नहीं के शायरी और कविताओं में इंसान डूब जाता है। अच्छी कवितायेँ इंसान के अंदर एक लौ जला सकती हैं। इनसे हमारा ख़ुद को और दुनिया को देखने का नज़रिया भी बदलता है।"

उन्होंने आगे कहा, "कलाकार और कवि इंसानी जज़्बात की नस पकड़ते हैं। अकेले वो इंसानियत को नहीं बचा सकते मगर उनके बिना शायद ही कुछ बचाने के लिए बाक़ी रहे। दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल के रूप में हमारी कोशिश है की हम एक स्वतंत्र और निडर प्लेटफार्म मुहैया कराएं।"

दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल के एग्जीक्यूटिव प्रोडूसर संजय अरोड़ा  कहते है, "परेशान ज़हन और बिगड़े नज़रिये के लिए शायरी एक पनाहगाह है। अफ़रातफ़री के इस दौर में यह एक इकलौती सुकून की जगह है। शायरी और कविताओं का जश्न इंसानियत में हमारे भरोसे का सबूत है। 2013 में अपनी स्थापना के बाद से ही दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल काव्यात्मक अभिव्यक्ति के लिए प्लेटफार्म देने और बदलाव की बयार लाने के लिए प्रतिबद्ध है। ये उत्सव इसबार भी शायरी और कविताओं के विभिन्न आयामों को उनके बेहतरीन रंग में सामने लाने के लिए तैयार है।"

वारिस शाह- दोनों पंजाब से निकलने वाली सबसे असरदार शायराना आवाज़ों में से एक और हीर रांझा महाकाव्य के लेखक वारिस शाह को उनकी 300वीं बरसी पर याद करते हुए।

इस विश्वसनीय उत्सव में पेश की जाने वाली सामग्री में गहरा असर है। शायरी प्रतिरोध की हर दीवार को तोड़ देती है और ख़ामियों की अँधेरी दरारों में जा कर कुछ नए और ख़ूबसूरत चीज़ों का निर्माण करती है। इस साल हम उत्सव में पंजाबी कवितायेँ भी जोड़ रहे हैं और ऐसा करने के लिए इससे बेहतर साल क्या ही होगा जब महान कवि वारिस शाह की 300वीं जयंती मनाई जा रही है।

इसमें पंजाबी के मशहूर कवि पदम् श्री सुरजीत पातर जिन्होंने वारिस शाह की कविताओं पर बड़े पैमाने पर काम किया है और खुशमिज़ाज डॉ वनिता के बीच सहज बातचीत शामिल होगी जिसे हमने ‘हवा विच लिखे हर्फ़ नाम’ दिया है। सुरजीत पातर को दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल के बोर्ड सदस्य के रूप में भी जगह दी जाएगी। बोर्ड में वसीम बरेलवी, सुकृता पॉल कुमार, फरहत शहज़ाद और उदय प्रकाश जैसे नाम भी शामिल हैं। वारिस शाह के कविताओं की चर्चा 21वीं सदी में हीर की प्रासंगिकता के अनिवार्य विषय पर की जाएगी जिसमे वारिस शाह की हीर और उनका प्यार, उनका जीवन, उनका संघर्ष और उनकी मौत पर बातें होंगी। डॉली सिंह द्वारा संचालित इस कार्यक्रम में डॉ वनिता, रेने सिंह और सकून सिंह अपने विचार साझा करेंगी। पंजाबी विद्वान और इतिहासकार सुमेल सिंह सिंधु वारिस शाह पर अपनी बात रखेंगे और महान कवि वारिस शाह के प्रति अपने दशकों पुराने प्रेम का इज़हार करते हुए आज के समाज के लिए उनकी प्रासंगिकता बयान करेंगे। इस साल कार्यक्रमों का चयन बहुत सोच-समझ कर किया गया है और इसे युवाओं के लिए अर्थपूर्ण और सोच पैदा करने के लिए तैयार किया गया है।

पारम्परिक प्रकाशन में आये बदलाव के तहत अब उसमे पॉडकास्ट को भी जगह मिली है। महामारी में पॉडकास्ट का चलन और बढ़ा है। कवियों के लिए आज के समय में पॉडकास्ट की प्रासंगिकता और इसे स्वयं रिकॉर्ड करने की तकनीक पर दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल एक कार्यशाला का आयोजन भी करेगा। बंद कमरे में होने वाली इस कार्यशाला में भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन की आवश्यकता होगी। हालांकि आम दर्शक उन्ही वक्ताओं को मुफ़्त में भी कुछ कार्यक्रमों में सुन पाएंगे।

अन्य त्रासदियों की तरह यूक्रेन युद्ध को लेकर भी समर्थन और विरोध में बेहिसाब कवितायें लिखी जा रही हैं। निदेश त्यागी ने काफ़ी मेहनत से ऐसी कुछ झकझोर देने वाली कविताओं का अनुवाद किया है और वे हमें युद्धग्रस्त भूमि के हालात का एहसास कराने के लिए 'युद्ध की व्यथा- यूक्रेन की काव्य पुकार' सत्र में इन अनुवादित कविताओं का पाठ करेंगे।

देशों को अलग करने वाली सीमाएं नक़्शे पर बनी काल्पनिक रेखाएं हैं जो इन सीमाओं के आर-पार रहने वाले लोगों को अलग नहीं कर सकतीं। युवा एमी सिंह एक नायाब और बेहद आत्मीय पहल कर के हमारे साथ एक छोटा सा सत्र साझा करेंगी जिसमे वो लाहौर जीपीओ के पोस्टमॉस्टर जनरल को समर्पित अपने मार्मिक पत्रों को पढ़ेंगी।

‘इकोज़ ऑफ़ पार्टीशन’ में बंटवारे का दर्द, जानी-पहचानी गलियों की यादें और बिछड़े दोस्तों के क़िस्से दिल को सुकून पहुंचाएंगे। राहुल सिंह, जो ख़ुशवंत सिंह लिटरेचर फ़ेस्टिवल के संस्थापक हैं, और सुकृता पॉल कुमार पुरानी यादों को निरुपमा दत्त के साथ ताज़ा करेंगे।

रब्बी शेरगिल हमारी सांस्कृतिक और पारिवेशिक विरासत से भावुकता से जुड़े हुए हैं और उन्हें इन दोनों में आ रही गिरावट को देख कर उदासी होती है। वो डॉली सिंह के साथ बातचीत में सांस्कृतिक गिरावट के इस दौर में रचनात्मक कलाकारों के महत्त्व पर अपने विचार व्यक्त करेंगे।

इस महोत्सव में बॉलीवुड को भी जगह दी जाएगी। राष्ट्रीय अवार्ड जीत चुके डाक्यूमेंट्री फ़िल्म निर्माता ब्रह्मानंद सिंह किताबों और सिनेमा के माध्यम से संगीत की विरासत खड़ी करने को लेकर सुआंशू खुराना के साथ एक गहन बातचीत करेंगे।

गुज़रे ज़माने के मशहूर गीतकार आनंद बख़्शी के जीवन और लेखन के बारे में उनके बेटे राकेश आनंद बख़्शी 'कुछ तो लोग कहेंगे' सत्र में ब्रह्मानंद सिंह के साथ बातचीत करेंगे। हलके फुल्के अंदाज़ में कविता, लोक और रिवायत के संगम को एक जोशीले सत्र: 'मधनिया; पंजाबी शादियों के गानों में कविता' के माध्यम से पेश किया जायेगा। सूफ़ी गायक राधिका सूद नायक पंजाबी गाने गाएंगी और एमी सिंह पंजाबी शादियों के माहौल का चित्रण अपनी आवाज़ में करेंगी।

माहिर कवियों और शायरों द्वारा कविता पाठ के बिना हर पोएट्री फ़ेस्टिवल अधूरा रहता है। इसलिए हमने 4 कविता पाठ सत्र का आयोजन किया है -एक हिंदी/उर्दू , एक अंग्रेज़ी और 2 सत्र भारत की 2 अन्य भाषाओँ में और इसका नाम 'दी मेल्टिंग पॉट' रखा गया है।

'दी मैजिक एकफ़्रेसिस : पोएट्री, डांस, म्यूजिक और फ़ोटोग्राफ़ी' के इस जादुई सत्र में कत्थक की माहिर डॉ अर्शिया सेठी और कवि सुदीप सेन कविता और नृत्य की बारीकियों के बारे में बात करेंगे।

दिल्ली पोएट्री फ़ेस्टिवल की पहल  शी एस्केप एक नारी-केंद्रित प्लेटफार्म है और इसके तहत तीन महिला कॉमेडियन 'विथ अ पिंच ऑफ़ साल्ट'  नामक सत्र में एक आनंदमय प्रस्तुति  देंगी।

दिल्ली पोएट्री फ़ेस्टीवल में 'टर्मोइल इन पंजाब -बिफोर एंड आफ्टर ब्लू स्टार' किताब पर एक लम्बी बातचीत आयोजित की जायेगी। इसमें किताब के लेखक और ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय अमृतसर के डीएम रहे रमेश इन्दर सिंह और विपुल मुद्गल के बीच अनकहे पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
कविता और शायरी के इस बड़े जश्न में इन सब के साथ और भी बहुत कुछ में शामिल होने के लिए हम आप की राह देख रहे हैं। इंडिया हैबिटैट सेंटर का मशहूर परिसर उन आवाज़ों से गूंजेगा जो बदलाव लाने, सोच को उभारने और विचारों को बदलने का वादा करती हैं।

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