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सद्भावना ट्रस्ट लखनऊ में महिला दिवस समारोह एवं लीडरशिप बिल्डिंग सर्टिफिकेशन कार्यक्रम

सद्भावना ट्रस्ट, 2009 से लखनऊ शहर की बस्तियों में ज़रूरतमंद समुदाय के साथ काम रही हैं। संस्था विशेषकर लड़कियों और महिलाओं के साथ सामाजिक मुद्दे पर नज़रिया निर्माण करके उन्हें नेतृत्व में लाने का काम करती हैं। साथ ही युवा महिलाओं को तकनीकि कौशल का हुनर देते हुये उनको सशक्तीकरण एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।


सद्भावना ट्रस्ट लखनऊ ने आज, 11 मार्च 2023 को ज़रूरतमंद परिवार के युवाओं और महिलाओं के साथ महिला दिवस समारोह एवं लीडरशिप बिल्डिंग सर्टिफिकेशन कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम पुराना हैदरगंज चौराहा, लखनऊ में स्थित द रॉयल सेलिबे्रशन स्थल पर संचालित किया गया। इस कार्यक्रम में 150 से ज्यादा लोग शामिल हुए। कार्यक्रम ने युवाओं और महिलाओं को अनेकों रूचिकर प्रस्तुति से सीखने- सिखाने का मौका प्रदान किया।

कार्यक्रम के दौरान अतिथि के रूप में ज़ाजबिया ख़ान (सामाजिक कार्यकर्ता) अनुराग पाण्डेय(ठाकुरगंज क्षेत्र के पूर्व पार्षद), गीता पाण्डे (ठाकुरगंज क्षेत्र के पूर्व पार्षद), अबरार (सामाजिक कार्यकर्ता), सुधांशु (अवध पीपल  फोरम ), बुशरा शेख (कंटेंट क्रिएटर), अफरोज (हमसफ़र संस्था), भावना (सार्थक संस्था), सुधांशु (अवध पीपल फोरम), मरियम और सोनू (सनदकदा) मौजूद रहे।


कार्यक्रम में युवाओं और महिलाओं के अनुभव, सीख, चुनौती और असर को लेकर खुली चर्चा की गई। युवा लड़कों द्वारा ऐसा ही होता हैं नुक्कड़ नाटक पेश किया गया। महिलाओं की ओर से मॉक जर्नी दिखाई गईं। युवा महिलाओं ने गीत- दीवारे ऊंची हैं गलियां हैं तंग पेश किया। फिल्म स्क्रीनिंग के ज़रिए नये कौश नईं राहे और बेखौफ नज़रे कार्यक्रम की एक झलक प्रस्तुत की गई। नेतृत्व विकास कार्यक्रम से जुड़े लगभग 120 युवाओं और महिलाओं को प्रमाण पत्र वितरण करके उन्हें सम्मानित किया गया।   

कार्यक्रम में पैनल डिस्कशन के माध्यम से महिलाओं ने बताया कि नेतृत्व विकास कार्यकम (डिजिटल लिटरेसी प्रोग्राम) ने उन्हें डिजिटल दुनिया से जुड़ने का मौका दिया। आज वे घर का सिलेंडर बुक करने से लेकर बैंक से पैसा निकालने का काम स्वतंत्र रूप से कर रही हैं। इन हर वॉइस कार्यक्रम से जुड़े युवा लड़कों ने बताया कि पहले वे कभी भी अपनी घर की महिलाओं को घरेलू काम में मदद नही करते थे, कार्यक्रम से जुड़ने के बाद वह समझ पाएं हैं कि महिला और पुरूष दोनों हर काम को सामान्य रूप से कर सकते हैं।


बेखौफ नज़रे कार्यक्रम से जुड़ी लड़कियों ने बताया कि वे स्वयं को समुदाय की सक्रिय नेत्री के रूप में पहचान बना पा रही हैं और अपने मोहल्लों के मसलों पर आवाज़ उठाते हुए प्रशासन तक अपनी पहुंच बना रही हैं। नये कौशल नई राहें कार्यक्रम (जॉब स्कील्स प्रोग्राम) से जुड़ी लड़कियों ने बताया कि उन्होंने खुद के लिए नये सपने देखे और बाहर निकल कर काम करने का आत्मविश्वास बढ़ाया। साथ ही उन्होने ये भी समझा कि मौजूदा माहौल में नौकरी के लिए किस तरह की क्षमताओं की ज़रूरत हैं।

समुदाय से नेतृत्व में उभरी लड़कियां जो अब बाहर जाकर नौकरी कर रही हैं और अपने परिवार को सहयोग कर रही हैं, उन्होंने अपनी ज़िन्दगी से जुड़े निर्णय, शादी के अतिरिक्त ज़िन्दगी के विकल्प और कम उम्र में शादी के बाद भी नये मौके खुद से चुने और अपने जीवन में बदलाव लाकर अपने परिवार को भरोसा दिया। पूरे कार्यक्रम में महिलाओं की सकारात्मक छवि दिखी, जिसमें वे हर क्षेत्र में खुद को साबित करने की जद्दोजहद करती हुई नज़र आईं।  


कार्यक्रम को रूचिकर बनाने के लिए कई खेल भी खिलाए गये जैसे- चोंच मार, अनदेखा सफ़र, ज़ोर से बोल और नज़र हटी दुर्घटना घटी। खेल का उद्देश्य था समाज में लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव, पूर्वागृह, गतिशीलता, सपना/करियर, आत्मविश्वास, शिक्षा और समानता पर चर्चा करते हुए युवाओं और महिलाओं की समझ बनाना।  

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