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दुनिया के 10 सबसे खूबसूरत शहर

अगर आप घूमने-फिरने के शौकीन हैं और खुद को एक्सप्लोर करना चाहते हैं तो दुनिया के कुछ सबसे खूबसूरत शहरों में आपको जरूर जाना चाहिए।
आइए जानते हैं कौन से हैं ये शहर जहां आपको एक बार जरूर जाना चाहिए।

देखिए वीडियो-

-Maswood Ahmed
Amity University
Kolakata

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ईमानदारी की श्रेष्ठता

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कोरोना वायरस को भगाने के लिए ऐसे बढ़ाएं अपनी शक्ति

कोरोना वायरस से बचने के लिए जितना जरूरी लॉकडाउन है, उससे ज्यादा जरूरी है इस दौरान खान-पान का ध्यान रखना। प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए डॉक्टर पौष्टिक आहार की सलाह दे रहे हैं। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉक्टर एके सिंह ने बताया कि आयुष मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश को अगर लोग मान ले तो निश्चित तौर पर लोगों की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत मजबूत होगी। उन्होंने अपील की है कि लोग लॉकडाउन का पालन जरूर करें । आयुष मंत्रालय की सलाह- 1. पूरे दिन गर्म पानी पीते रहे। 2. नियमित रूप से कम से कम 30 मिनट तक योगासन, प्राणायाम और ध्यान करें। 3. घर में मौजूद हल्दी, जीरा, धनिया और लहसुन आदि मसालों का इस्तेमाल भोजन बनाने में जरूर करें। 4. जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम है, वह चवनप्राश का सेवन करें। 5. तुलसी, दालचीनी, कालीमिर्च, सोंठ पाउडर और मुनक्के (नहीं है तो सूखी अदरक को पीसकर चूर्ण बना लें) से बनी काली चाय को दिन में एक से दो बार पिएं। 6. चाय में चीनी के बजाय गुड़ का उपयोग करें। इससे बेहतर बनाने के लिए नींबू के रस भी मिला सकते हैं। 7. सुबह और शाम दोनों नथुनों में तेल या नारियल का तेल या फिर घ

प्रवीण मिश्रा को दिल्ली में मिला मीडिया एक्सेलेंस का बेस्ट प्रोड्यूसर अवार्ड

बिहार के मधुबनी जिला में खजौली थाना के सुक्की गांव के प्रवीण कुमार मिश्रा को मीडिया में उत्कृष्ट योगदान के लिए मीडिया फेडरेशन ऑफ इंडिया के बेस्ट प्रोड्यूसर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। प्रवीण कुमार मिश्रा को यह सम्मान मीडिया में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है।

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यूं तो झारखंड के आदिवासी समाज में औरतों की स्थिति, अन्य समाज की स्त्रियो की तुलना में पुरुष से संपत्ति के अधिकार की हो, तो ये उन सारी महिलाओं से पिछडी है जो अन्य क्षेत्रों में इनका अनुकरण करती है। आपको यह जानकर विस्मय होगा कि राज्य के जनजातीय समाज में महिलाओं को अचल संपत्ति में कोई वंशानुक्रम का अधिकार नहीं दिया जाता है। वर्तमान युग में, जब लैंगिक समानता का विषय विश्व भर में जोरों से चर्चा में है, यह अति अफसोसनाक है कि प्रदेश की आदिवासी महिलाओं को प्रथागत कानून के तहत भूमि के उत्तराधिकार से वंचित रखा गया है। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 कि धारा 7 एवं 8 में इस बात का उल्लेख है कि आदिवासी समाज में जमीन का उत्तराधिकार सिर्फ पुरुष वंश में ही किया जा सकता है। अर्थात, समाज की औरतों को इसका कतई अधिकार नहीं। हालांकि अधिनियम कि एक अन्य धारा पर गौर किया जाय तो यह मालूम होता  है कि यादि आदिवासी समाज में भूमि का हस्तांतरण, भेंट अथवा विनिमय किया जाना हो तो इसके लिए वंशानुगत पुरूष अथवा ‘अन्य ‘ योग्य है। जहां एक तरफ संथालपरगना के इलाके में ‘तानसेन जोम’ की परंपरा हैं, वही दूसरी तरफ संथालपरगना का

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