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दुनिया के 10 सबसे खूबसूरत शहर

अगर आप घूमने-फिरने के शौकीन हैं और खुद को एक्सप्लोर करना चाहते हैं तो दुनिया के कुछ सबसे खूबसूरत शहरों में आपको जरूर जाना चाहिए।
आइए जानते हैं कौन से हैं ये शहर जहां आपको एक बार जरूर जाना चाहिए।

देखिए वीडियो-

-Maswood Ahmed
Amity University
Kolakata

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वर्त्तमान समय में कोरोना महामारी एक ऐसा संकट है , एक ऐसी समस्या है जिससे न सिर्फ हिंदुस्तान बल्कि पूरा विश्व जूझ रहा है। बार बार लोगों के दिमाग में सिर्फ और सिर्फ एक ही सवाल आ रहा है और उस सवाल ने सभी की रातों की नींद उड़ा कर रख दी है कि कोरोना महामारी का अंत कब होगा ? इस महामारी के संकट से कैसे और कब छुटकारा मिल पायेगा ?

धरती का सबसे छोटा बच्चा!

काका उदास थे। उदासी उनके पास कोई पड़ा कारण नहीं था। बदलती आबोहवा से जब भी परेशानी होती है, उदासी उनके चेहरे पर बैठ जाती है। जब कोई चिड़िया गीत गाती हुई फुर्र से उड़ती है या कोई वृक्ष तेज हवा में घूमने लगता है, तब जाकर उनका चेहरा सामान्य हो पाता है। वे बड़ी देर से चुप बैठे थे। जो व्यक्ति खुद में उतर रहा हो या सामने किसी दृश्य को टटोल रहा हो, उसे टोकना अच्छी बात नहीं है। मौन में भी मजे है। मैं कभी-कभी सोचने लगती हूं कि पृथ्वी पर चिड़िया कब आयी होगी। हठात काका का मौन टूटा। वे मुझसे पूछ रहे थे कि तुम्हें क्या लगता है, पृथ्वी पर मानव पहले आया होगा और बहुत दिनों के बाद जब वह बोर होने लगा होगा, तब चिड़िया बनायी गयी होगी! मुझे चुप देख कहने लगे कि मनुष्य के पास चिड़िया बनाने का कोई हुनर नहीं है। इतने उपकरण और होशियार हो जाने के बाद, अगर आज भी मानव चिड़िया बनाने बैठे तो असफलता ही हाथ लगेगी। इस बात से यह साबित होता है कि मानव बाद में आया होगा, चिड़िया पहले आयी होगी। वे कहने लगे कि वृक्ष चिड़िया का घर तो होता ही है, साथ ही उनका जीवन भी होता है। पृथ्वी पर पहले वृक्षों को लगाया गया होगा कि चिड़िया आ

झारखंड का आदिवासी समाज और भूमि का उत्तराधिकार!

यूं तो झारखंड के आदिवासी समाज में औरतों की स्थिति, अन्य समाज की स्त्रियो की तुलना में पुरुष से संपत्ति के अधिकार की हो, तो ये उन सारी महिलाओं से पिछडी है जो अन्य क्षेत्रों में इनका अनुकरण करती है। आपको यह जानकर विस्मय होगा कि राज्य के जनजातीय समाज में महिलाओं को अचल संपत्ति में कोई वंशानुक्रम का अधिकार नहीं दिया जाता है। वर्तमान युग में, जब लैंगिक समानता का विषय विश्व भर में जोरों से चर्चा में है, यह अति अफसोसनाक है कि प्रदेश की आदिवासी महिलाओं को प्रथागत कानून के तहत भूमि के उत्तराधिकार से वंचित रखा गया है। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 कि धारा 7 एवं 8 में इस बात का उल्लेख है कि आदिवासी समाज में जमीन का उत्तराधिकार सिर्फ पुरुष वंश में ही किया जा सकता है। अर्थात, समाज की औरतों को इसका कतई अधिकार नहीं। हालांकि अधिनियम कि एक अन्य धारा पर गौर किया जाय तो यह मालूम होता  है कि यादि आदिवासी समाज में भूमि का हस्तांतरण, भेंट अथवा विनिमय किया जाना हो तो इसके लिए वंशानुगत पुरूष अथवा ‘अन्य ‘ योग्य है। जहां एक तरफ संथालपरगना के इलाके में ‘तानसेन जोम’ की परंपरा हैं, वही दूसरी तरफ संथालपरगना का

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