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अर्थव्यवस्था का पहिया कंप्यूटर नहीं, मेहनतकश मजदूर हैं

अभी, लगभग सभी लोग जान रहे हैं कि लॉकडाउन के कारण मजदूरों को समस्या हो रही है। हाल के दिनों में कुछ ऐसी खबरें आई हैं जो हमें विचलित कर देती हैं। आप सभी ने यह खबर निश्चित ही पढ़ी होगी कि महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास 16 मजदूरों की मालगाड़ी से कटकर मौत हो गयी। ये सभी मजदूर कामबन्दी  के कारण अपने घर वापस जाना चाह रहे थे, लेकिन कोई सुविधा नहीं होने के कारण पैदल ही चल पड़े थे। सभी ने घर जाने के लिए पटरियों का रास्ता अपनाया था।

इसके साथ ही सोशल मीडिया पर एक अभियान ट्रेंड कर रहा है कि मै भी प्रवासी मजदूर हूं। ऐसी संवेदनहीनता की जितनी निंदा की जाए, वह कम है। अनेक मजदूर पैदल ही हजार-हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए अपने घरों की ओर चल दिए हैं। कई राज्यों के मुख्यमत्रियों ने तो अनुरोध किया है कि प्रवासी मजदूर वापस न जाएं, अन्यथा कारखाने में काम चौपट जायेगा और खेतों में फसल की कटाई रुक जायेगी।
लॉकडाउन से मजदूरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है, लेकिन एक बात तो साबित हो गयी है कि देश की अर्थव्यवस्था का पहिया कंप्यूटर से नहीं, बल्कि मेहनतकश मजदूरों से चलता है। यह भी स्पष्ट हो गया है कि बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बिना किसी राज्य का काम चलनेवाले नहीं है। गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली जैसे राज्यों की जो चमक दमक नजर आती है, उसमें प्रवासी मजदूरों का बड़ा योगदान है। राज्यों की चमक-दमक उनके बिना खो भी सकती है।

दरअसल, ये प्रवासी मजदूर मेहनतकश हैं, लेकिन इन मजदूरों को सही आदर नहीं मिलता है। कई राज्यों में मजदूर को बेइज्जती करने तक की कोशिश की जाती है। कई राज्यों में बेवजह मजदूरों को निशाना भी बनाया गया है, लेकिन कोरोना ने मजदूरों और उनकी कठिनाइयों को विमर्श के केंद्र में ला दिया है।

महानगरों में तो जाति गौण है, उसकी जगह समाज विभिन्न वर्गों में विभाजित है। उच्च वर्ग, मध्य वर्ग और कामगार जिन्हें निम्न वर्ग का माना जाता है। मुंबई में वह धारावी में रहता है, तो दिल्ली एनसीआर में उसका डेरा खोड़ा है। बॉलीवुड ने धारावी को चर्चित कर दिया है, लेकिन खोड़ा से हम ज्यादा परिचित नहीं हैं। दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद से सटा एक गांव  है खोड़ा। यह देश का सबसे बड़ा गांव है और इसकी आबादी चार से पांच लाख है। इस पूरे क्षेत्र में कच्चे-पक्के मकान बने हुए हैं। इनमें अधिकांश अवैध हैं। बुनियादी सुविधाओं का नितांत है। जबकि यह गांव ठीक दिल्ली-एनसीसी के नाक के नीचे है। यहां बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों का गरीब तबका आपको मिल जायेगा। सबकी एक पहचान है कि वे सब मजदूर हैं, यह गांव दिल्ली आनेवाले हर मजदूर को पनाह को पनाह देता है।

मेरा मानना है कि जब हिंदी पट्टी के राज्य प्रगति करेंगे, तभी देश भी प्रगति कर पायेंगे ।


- भावना भारती
एमिटी यूनिवर्सिटी
कोलकाता

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अच्छे स्वास्थ्य के लिए उचित आहार

मनुष्य का स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर होता है कि उसका आहार कैसा है। यदि आहार संतुलित हो तो बेहतर है, परंतु यदि शरीर में किसी तत्व की कमी है तो संतुलित आहार भी उसके लिए उचित आहार नहीं होगा। इसके लिए आपको शरीर की जरूरतों के मुताबिक आहार लेना चाहिए।

विदेशों में परामर्श के लिए डाइटिशियन होते हैं जो डॉक्टर के भांति स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करते हैं, परंतु भारत में इस समय केवल बड़े हॉस्पिटल में ही आहार विशेषज्ञ होते हैं। स्वतंत्र प्रैक्टिस करने वाले आहार विशेषज्ञ केवल महानगरों में ही है।

अगर आप डाइट के बारे किसी आम आदमी से पूछे तो उत्तर होगा कि पेट भर के खाओ और ठीक से पच जाए तो वही सही आहार है। अगर आप पूछे कि मोटापा कम करना है तो सीधा-साधा उत्तर मिलेगा कि कम खाओ और दबाकर काम करो। अपने आप वजन कम हो, छरहरा होना या बिना कमजोरी के वजन कम करना उतना आसान नहीं है, जितना आसान प्रतीत होता है, फिर भी यह कार्य कठिन भी नहीं है। प्रत्येक मनुष्य की शारीरिक क्षमता, पाचन शक्ति और जीवनशैली का भी आहार से सीधा संबंध होता है। इसलिए आहार का चुनाव करते समय इस बात का सदैव ध्यान रखें।।
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कोरोना वायरस को भगाने के लिए ऐसे बढ़ाएं अपनी शक्ति

कोरोना वायरस से बचने के लिए जितना जरूरी लॉकडाउन है, उससे ज्यादा जरूरी है इस दौरान खान-पान का ध्यान रखना। प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए डॉक्टर पौष्टिक आहार की सलाह दे रहे हैं। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉक्टर एके सिंह ने बताया कि आयुष मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश को अगर लोग मान ले तो निश्चित तौर पर लोगों की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत मजबूत होगी। उन्होंने अपील की है कि लोग लॉकडाउन का पालन जरूर करें ।

आयुष मंत्रालय की सलाह-
1. पूरे दिन गर्म पानी पीते रहे।
2. नियमित रूप से कम से कम 30 मिनट तक योगासन, प्राणायाम और ध्यान करें।
3. घर में मौजूद हल्दी, जीरा, धनिया और लहसुन आदि मसालों का इस्तेमाल भोजन बनाने में जरूर करें।
4. जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम है, वह चवनप्राश का सेवन करें।
5. तुलसी, दालचीनी, कालीमिर्च, सोंठ पाउडर और मुनक्के (नहीं है तो सूखी अदरक को पीसकर चूर्ण बना लें) से बनी काली चाय को दिन में एक से दो बार पिएं।
6. चाय में चीनी के बजाय गुड़ का उपयोग करें। इससे बेहतर बनाने के लिए नींबू के रस भी मिला सकते हैं।
7. सुबह और शाम दोनों नथुनों में तेल या नारियल का तेल या फिर घी लगाए।

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