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तुम दुनिया से जरूर गऐ लेकिन हमारे दिल से नहीं...

कोरोना संकट से अभी दुनिया उभर भी नहीं पाई है कि हमें एक और काला समाचार मिल गया। जी हॉं... हम हिंदी सिनेमा के एक बेहतरीन और जाने-माने सितारे ऋषि कपूर के बारे में बात कर रहे हैं।अब हमारे बीच चांदनी फिल्म के रोहित गुप्ता नहीं रहे।
 4 सितम्बर 1952 चेम्बुर मुंबई में कपूर खानदान में जन्मे ऋषि कपूर का 30 अप्रैल 2020 को निधन हो गया। ऋषि कपूर ने हिंदी सिनेमा में बतौर कलाकार, निर्माता-निर्देशक फिल्म जगत में प्रवेश किया था। उन्होंने अपने पिता की फिल्म में एक बाल कलाकार के तौर पर अपने अभिनय की जिन्दगी शुरू की थी।
हालांकि लीड रोल में इनके करियर की शुरुआत फिल्म बॉबी में डिम्पल कपाडिया के साथ हुई। इस फिल्म के निर्देशक इनके पिता राज कपूर थे। ऋषि कपूर ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को बॉबी, जहरीला इन्सान, खेल-खेल में, लैला-मजनूं, कभी-कभी, अमर-अकबर एंन्थनी, चांदनी जैसी बहुत अच्छी और बेहतरीन फिल्में दी हैं।

उन्होंने अपने इस फिल्मी करियर में बहुत सारे बेहतरीन पुरस्कार भी अपने नाम किए हैं। इनमें से कुछ हैं फिल्म बॉबी के लिए बेस्ट एक्टर फिल्म फेयर अवार्ड, मेरा नाम जोकर में सर्वश्रेष्ठ बाल कलाकार के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार। दो-दूनी चार फिल्म में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड मिला।
 
वर्ष 2018 मैं इन्हें पहली बार पता चला कि उन्हें कैंसर हैं। इन्होंने कैंसर से बहुत लम्बी लड़ाई लड़ी, लेकिन 30 अप्रैल 2020 को इस लड़ाई में हार गएं। मुंबई के एक अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली।

उनके निधन से परिवार के साथ पूरे देश में उनके चाहने वाले को बहुत बड़ा झटका लगा है। पूरे देश में शोक की लहर है। कोरोना लॉकडाउन के कारण उनके चाहने वाले उनका अन्तिम दर्शन भी नहींकर पाए। ऋषि कपूर भले ही इस दुनिया से चले गए, लेकिन उनकी फिल्में, उनकी कलाकारी, उनका प्यार हमारी दिलों में हमेशा जीवित रहेगी। भगवान उनकी आत्मा को शांति दें।

-भावना भारती

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