Skip to main content

सभी भारतीयों को आयुर्वेद के माध्यम से प्रतिरक्षा विकसित करना आवश्यक- गुरु मनीष

प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ गुरु मनीष ने आयुर्वेद का उपयोग करते हुए प्राकृतिक इम्युनिटी बढ़ाने पर जोर दिया है, ताकि कोरोना सहित सभी तरह के संक्रमण को दूर रखा जा सके। 'शुद्धि आयुर्वेद' के संस्थापक गुरु मनीष ने टीकाकरण अभियान के बाद भी सभी भारतीयों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे आयुर्वेद के जरिए प्रतिरक्षा विकसित करें।


'राइट टू आयुर्वेदा' संबंधी एक अखिल भारतीय व अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन हस्ताक्षर अभियान के संचालक ने कहा कि मैं टीकाकरण अभियान की सराहना करता हूं, हालांकि सभी भारतीयों को वैक्सीन लगाने में लंबा समय लगेगा, क्योंकि हमारे देश की आबादी 1.3 अरब से अधिक है जो दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी आबादी है। ऐसे में हम सब भारतीयों को सदियों से जांचे-परखे आयुर्वेद द्वारा इम्युनिटी बूस्टिंग प्रोटोकॉल का उपयोग करना चाहिए। इससे लोगों की प्रतिरक्षा में स्वाभाविक रूप से सुधार होगा और टीकाकरण होने तक उन्हें वायरस से बचने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि हालांकि टीका वायरस को रोकने में मदद करेगा, लेकिन जब तक हम आयुर्वेद के माध्यम से अपनी प्राकृतिक प्रतिरक्षा को नहीं बढ़ाते, तब तक वायरस को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता। ऐसे देश में जहां आयुर्वेद का जन्म हुआ, सरकार के लिए जरूरी है कि प्रतिरक्षा बढ़ाने वाली प्रणाली के रूप में आयुर्वेद को बढ़ावा दे, न कि सिर्फ टीकाकरण अभियान चलाये। सिक्के के दोनों पहलुओं पर ध्यान देने की आवश्यकता है।


गुरु मनीष ने इस बात पर जोर दिया कि हमारे प्राचीन ग्रंथ चरक संहिता के अनुसार बदलते मौसम के साथ हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली में उतार-चढ़ाव होता है, जो कि वर्तमान में देखा भी जा रहा है, क्योंकि मौसम वसंत से गर्मियों में बदल रहा है। यह तब होता है जब हमारा शरीर एक अनुकूलन प्रक्रिया से गुजरता है, जिससे यह रोगजनकों और वायरस के हमलों के प्रति कमजोर हो जाता है। वर्तमान मौसम परिवर्तन में इनसे बचाव की जरूरत है। गुरु मनीष इस चरण में वायरस को दूर करने के लिए आयुर्वेद में प्रस्तावित समाधान प्रदान करते हैं।
 
गुरु मनीष ने कहा कि जब मौसम बदलता है, आयुर्वेद के अनुसार, हमें 1-2 दिनों के लिए उपवास करना चाहिए, जो शरीर को फिर से जीवंत करने में मदद करेगा, उसकी इम्युनिटी बढ़ाएगा और इसे डिटॉक्सीफाई भी करेगा। उन्होंने कहा कि आयुष काढ़ा, हल्दी मिले गर्म पानी के गरारे और गिलोय की उपयोगिता को सरकार ने भी माना है, हालांकि इन्हें आयुर्वेद चिकित्सकों के मार्गदर्शन में लिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शुद्धि आयुर्वेद ने गहन शोध के बाद एक अनूठा कॉम्बो बनाया है जो इम्युनिटी को विकसित करने में मदद करता है। कॉम्बो में हमने तीन दवाएं शामिल की हैं -विषहर रस, बत्तीस जड़ी बूटियों वाली चाय और आयुष क्वाथ। विषहर रस में नीम और गिलोय जैसे तत्व होते हैं, जिनमें उच्च एंटीवायरल गुण होते हैं। चाय में 32 औषधीय जड़ी-बूटियां शामिल हैं जैसे कि इलायची, दालचीनी आदि जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं और आयुष क्वाथ में तुलसी, काली मिर्च व शुंथी शामिल है जो प्रतिरक्षा बढ़ाने में मदद करती है।

Comments

Most Popular

कोरोना से जुड़े अहम सवाल

आंकड़ों को दर्ज करने के मामले में भारतीय स्वास्थ्य प्रबंधन तंत्र कभी अच्छा नहीं रहा। बीमारियों के मामलों को दर्ज करने में पूर्वाग्रह की स्थिति रही है। यह स्थिति कोविड-19 महामारी में भी जारी है। उदाहरण के तौर पर तेलंगाना में छह डॉक्टर ने लिखा कि कैसे राज्य के कुल आंकड़ों में कोविड 19 से होनेवाली मौतों का जिक्र नहीं किया जा रहा है।

विष्णु भक्त नारद मुनि

भगवान विष्णु के परम भक्त नारद ब्रह्मा जी के पुत्र हैं। उन्होंने भगवान विष्णु की भक्ति और तपस्या की। नारद जी पर देवी सरस्वती की भी कृपा थी। उन्हें हर तरह की विद्या में महारत हासिल थी।

प्रकृति का सुहाना मोड़

सड़कों पर सन्नाटा, दफ्तरों, कारखानों और सावर्जनिक स्थानों पर पड़े ताले से भले ही मानव जीवन में ठहराव आ गया है, लेकिन लॉकडाउन के बीच प्रकृति एक नयी ताजगी महसूस कर रही है। हवा, पानी और वातावरण साफ हो रहे हैं। हम इंसानों के लिए कुछ समय पहले तक ये एक सपने जैसा था। इन दिनों प्रकृति की एक अलग ही खूबसूरती देखने को मिल रही हैं जो वर्षों पहले दिखाई देती थी।

ना धर्म देखा ना उम्र देखा, ना अमीर देखा और ना ही गरीब!

कोरोना महामारी से एक बात तो साफ हो गई कि प्रकृति ही सबसे बड़ा धर्म है। इसने किसी भी धर्म को अनदेखा नहीं किया और सब पर बराबर की मार की है। चाहे वह किसी भी धर्म का हो, अमीर हो या गरीब, कोरोना ने किसी को नहीं छोड़ा।

हॉलीवुड की टॉप 10 हॉरर मूवी

क्या आप को हॉरर फिल्में देखना बहुत पसंद हैं? और अगर वो हॉरर फिल्म अगर किसी सच्ची कहानी से प्रेरित हो