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कोरोना के कोहराम में प्लाज्मा थेरेपी रामवाण हो सकता है डुबते को तिनका सहारा

कोरोना जैसी बैfश्वक महामारी के दंश से भारत ही नहीं ,वरन सम्पूर्ण विश्व में कोहराम मचा है, सम्पूर्ण मानव जाति / अपने आप को महाशक्ति के राष्ट्राध्यक्ष अपने आप को सर्वाच्य  शक्ति मानते हुए परमाणु बम की घमकी बातों बात देते थे,वह महाशक़ि आज कोरोना के सुक्ष्म वायरस कं आगे घुटने टेकने को विवश है, ऐसे में प्लाज्मा थेरेपी इन दिनों काफी सुर्खियों में है, इसे वर्तमान समय में फैली महामारी के इलाज के कारगर तरीके के रूप में देखा जा रहा है। इन दिनों प्लाज्मा थेरेपी पर अनुसंधान किया जा रहा है, ताकि इस बात का पता लगाया जा सके कि इससे कोरोनावायरस का इलाज संभव है अथवा नहीं। इसी कारण, लोगों के मन में इस थेरेपी को लेकर काफी सारे सवाल हैं, जैसे प्लाज्मा थेरेपी क्या है, इसका इस्तेमाल कैसे और कब किया जाता है इत्यादि।

हालांकि, वे इन सवालों का उत्तर जानने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें संतुष्टि नहीं मिल पा रही है। यदि आप भी इस थेरेपी के बारे में अधिक जानना चाहते हैं तो आपको इस लेख को ज़रूर पढ़ना चाहिए क्योंकि इसमें हम प्लाज्मा थेरेपी की पूर्ण जानकारी देने जा रहे हैं।

प्लाज्मा थेरेपी क्या है?
प्लाज्मा थेरेपी को मेडिकल साइंस की भाषा में प्लास्माफेरेसिस (plasmapheresis) नाम से जाना जाता है। प्लाज्मा थेरेपी से तात्पर्य ऐसी प्रक्रिया से है, जिसमें खून के तरल पदार्थ या प्लाज्मा को रक्त कोशिकाओं (blood cells) से अलग किया जाता है। इसके बाद यदि किसी व्यक्ति के प्लाज्मा में अनहेल्थी टिशू मिलते हैं, तो उसका इलाज समय रहते शुरू किया जाता है।

प्लाज्मा थेरेपी को क्यों किया जाता है?
हालांकि, प्लास्माफेरेसिस आधुनिक मेडिकल साइंस की देन है, जिसने काफी सारे लोगों की ज़िदगी को बदल दिया है। इसके बावजूद, राहत की बात है कि इसे सामान्य स्थितियों में नहीं बल्कि इसे कुछ विशेष उद्देश्यों के लिए किया जाता है। अत: प्लाज्मा थेरेपी को मुख्य रूप से इन 5 उद्देश्य के लिए किया जाता है-

संक्रमण का पता लगाना- प्लाज्मा थेरेपी को मुख्य रूप से संक्रमण का पता लगाने के लिए किया जाता है। चूंकि, काफी सारी बीमारियाँ संक्रमण के द्वारा होती है, इसलिए ऐसी बीमारियों का इलाज करने में प्लाज्मा थेरेपी काफी कारगर उपाय साबित होती है।
डोनर पार्ट का सही तरीके से काम न करना- वर्तमान समय में काफी सारे ट्रांसप्लांट किए जाते हैं, मगर कई बार ये असफल साबित हो जाते हैं।जब ट्रांसप्लांट कराने वाले लोगों के लिए डोनर पार्ट सही तरीके से काम नहीं करता है, तब उन्हें प्लाज्मा थेरेपी सहायता करती है।
खेल में चोट (Sport Injury) लगना- कई बार, खेल में चोट का इलाज करने के लिए फ्लास्माफेरेसिस का सहारा लिया जाता है। इस प्रकार, इस थेरेपी को स्पोर्ट्स इंजरी को ठीक करने के लिए भी किया जाता है।
मायस्थीनिया ग्रेविस का इलाज करना- जब कोई व्यक्ति मायस्थीनिया ग्रोविस (Myasthenia gravis) से पीड़ित होता है, तो उसका इलाज करने के लिए डॉक्टर प्लाज्मा थेरेपी की सहायता करते हैं।
मायस्थीनिया ग्रोविस से तात्पर्य ऐसी मानसिक बीमारी है, जिसमें लोगों की मांसपेशियाँ कमज़ोर हो जाती हैं।
गुलियन बेरी सिंड्रोम का इलाज करना- अक्सर,प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल गुलियन बेरी सिंड्रोम (Gullian Berry Syndrome) का इलाज करने के लिए भी किया जाता है। गुलियन बेरी सिंड्रोम रोग-प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करने की बीमारी है, जिसका असर लोगों की सेहत पर पड़ता है और उनके बीमार होने की संभावना काफी अधिक बढ़ जाती है।

प्लाज्मा थेरेपी को कैसे किया जाता है?
प्लाज्मा थेरेपी एक दिन की प्रक्रिया है, जिसमें 1-3 घंटे का समय लगता है। इसे काफी सावधानी से किया जाता है, ताकि इसे कराने वाले लोगों को किसी तरह के दर्द या तकलीफ़ महसूस न हो।

इसमें कुछ महत्वपूर्ण स्टेप्स शामिल हैं, जो इस प्रकार हैं-
स्टेप 1:सुई को लगाना- प्लाज्मा थेरेपी की शुरूआत सुई लगाकर होती है, जिसमें लोगों की बाँह में लगाया जाता है।
स्टेप 2: खून को निकालना- सुई लगाने के बाद खून निकाला जाता है, जिसके लिए अपकेंद्रित मशीन (centrifuge machine) का इस्तेमाल किया जाता है।
स्टेप 3:प्लाज्मा का निर्माण या तैयार करना- प्लाज्मा थेरेपी कराने वाले व्यक्ति के शरीर से खून निकालने के बाद डॉक्टर प्लाज्मा का निर्माण या तैयार किया जाता है।
स्टेप 4: इंजेक्शन लगाना- जैसे ही प्लाज्मा का निर्माण किया जाता है, तब उसके इंजेक्शन को लोगों के शरीर में डाला जाता है।
स्टेप 5: इंजेक्शन वाली जगह को साफ करना- लोगों के शरीर में प्लाज्मा के इंजेक्शन डालने के बाद ही यह प्रक्रिया समाप्त हो जाती है। इसके बाद,इंजेक्शन वाली जगह को साफ करने के बाद बैंडेज की जाती है।

प्लाज्मा थेरेपी के लाभ क्या है?
प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल काफी सालों से किया जा रहा है, जिसका लाभ काफी सारे लोगों को मिला है।

इसके अलावा, डॉक्टर भी प्लाज्मा थेरेपी कराने इसलिए देते हैं, क्योंकि इसके काफी सारे लाभ होते हैं, जिनमें से मुख्य 5 इस प्रकार हैं-
रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना- प्लाज्मा थेरेपी कराने का सबसे बड़ा लाभ रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना है। जिस लोगों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर या मजबूत होती है, उनके बीमार होने की संभावना काफी कम रहती है।
अन्य बीमारियों का इलाज करना- यह थेरेपी चेहरे,बाल,चेहरे इत्यादि से जुड़ी समस्याओं का भी समाधान करने में भी कारगर साबित होती है।इस प्रकार, प्लाज्मा थेरेपी से इन समस्याओं को भी ठीक किया जा सकता है।
समय की बचत होना- जहां एक ओर, कुछ सर्जरी में काफी समय लगता है, वहीं दूसरी प्लाज्मा थेरेपी में काफी कम (3-5 घंटे) समय लगता है। इसकी वजह से, लोगों को इस थेरेपी को कराने पर समय की बर्बादी नहीं होती है।
दर्द महसूस न होना- प्लाज्मा थेरेपी का अन्य लाभ दर्द महसूस न होना भी है। जब इस थेरेपी को किया जाता है, तो इसे कराने वाले लोगों को किसी तरह का दर्द महसूस नहीं होता है।
जल्दी रिजल्ट आना या दिखना- इस थेरेपी के काफी सारे ऐसे मामले सामने आते हैं, जिनमें इसे कराने वाले लोगों को आराम मिलता है। इस प्रकार, प्लाज्मा थेरेपी का अन्य लाभ जल्दी रिजल्ट आना या दिखना है।

प्लाज्मा थेरेपी के संभावित खतरे क्या हो सकते हैं?
हालांकि, प्लाज्मा या प्लास्माफेरेसिस थेरेपी को काफी कारगर तरीका माना जाता है, लेकिन इसके बावजूद किसी भी अन्य मेडिकल प्रक्रिया की तरह प्लाज्मा थेरेपी के भी कुछ संभावित खतरे होते हैं, जिनकी जानकारी सभी लोगों को होनी चाहिए। इस प्रकार, यदि कोई इस थेरेपी को कराता है, तो उसे निम्नलिखित खतरों का सामना करना पड़ सकता है-

संक्रमण होना- हालांकि, प्लाज्मा थेरेपी को संक्रमण का पता लगाने के लिए किया जाता है, लेकिन इसके बावजूद यह समस्या इसके बाद भी रह सकती है। अत: इस थेरेपी का प्रमुख खतरा संक्रमण होना है।
नस का खराब होना- कई बार,प्लाज्मा थेरेपी का असर नस पर भी पड़ सकता है, जिसकी वजह से नस खराब हो सकती है।
बेहोशी होना- अक्सर, इस थेरेपी को कराने वाले कुछ लोग बेहोशी या कमज़ोरी रहने की शिकायत करते हैं। इस प्रकार, प्लाज्मा थेरेपी से लोगों को कमज़ोरी महसूस हो सकती है।
ब्लड क्लोट्स होना- प्लाज्मा थेरेपी की वजह से ब्लड क्लोट्स की संभावना भी बढ़ सकती है। हालांकि, ब्लड क्लोट्स का इलाज संभव है, लेकिन इसके बावजूद इसके लाइलाज रहने पर यह गंभीर समस्या बन सकती है।
धुँधला दिखाई देना- इस थेरेपी का असर मानव-शरीर के अन्य अंगों जैसे आंखों पर भी पड़ सकता है। इस कारण, प्लाज्मा थेरेपी कराने वाले लोगों को धुँधला दिखाई देने (blurred vision) की समस्या हो सकती है।

प्लाज्मा थेरेपी के बाद किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
ऐसा माना जाता है कि किसी भी सर्जरी या ऑपरेशन के बाद का समय काफी संवेदनशील होता है, जिसमें पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। यह बात प्लाज्मा थेरेपी पर भी लागू होती है क्योंकि इसके बाद लोगों में खतरे होने की संभावना काफी अधिक बढ़ जाती है।

इस प्रकार, यदि किसी व्यक्ति ने हाल ही में इस थेरेपी को कराया है तो उसे इन 5 बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए ताकि वह जल्दी से ठीक हो सके-
अधिक मात्रा में पानी पीना- प्लाज्मा थेरेपी के बाद लोगों के शरीर में पानी की कमी हो सकती है। इसके लिए इस थेरेपी को कराने वाले लोगों को अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए ताकि उन्हें यह समस्या न हो।
थेरेपी वाली जगह पर बर्फ के टुकड़े का इस्तेमाल न करना- चूंकि, थेरेपी वाली जगह पर दर्द महसूस हो सकती है। इस कारण इस थेरेपी को कराने वाले लोगों को थेरेपी वाली जगह पर बर्फ के टुकड़े का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए ताकि यह दर्द न बढ़े।
नशीले पदार्थों का सेवन न करना- प्लाज्मा थेरेपी के बाद लोगों को अपने खान-पान और सेहत पर विशेष ध्यान रखना चाहिए। अत: उन्हें नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि ये उनकी सेहत को खराब कर सकते हैं।
दर्द निवारक दवाइयों का सेवन करना- किसी भी अन्य मेडिकल प्रोसिस की तरह प्लाज्मा थेरेपी के बाद भी लोगों को दर्द हो सकता है। इस प्रकार, इसे कराने वाले लोगों को दर्द निवारक दवाइयों का सेवन करना चाहिए ताकि यह दर्द कम हो सके।
डॉक्टर के संपर्क में रहना- प्लाज्मा थेरेपी कराने वाले लोगों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वे डॉक्टर के संपर्क में रहें। उन्हें समय-समय पर डॉक्टर से मिलना चाहिए ताकि उनकी सेहत का पता चल सके। यकीनन रूप से दुनियाभर में काफी सारी नई-नई बीमारियाँ देखने को मिलती हैं, जिनकी वजह से काफी सारे लोगों को अपनी जान गवानी पड़ती है। ऐसे ही हालात इस दौर में फैली कोरोनावायरस से सामने आ रहे हैं, जिसके चपेट में अमेरिका, चीन, इटली इत्यादि सभी बड़े-बड़े देश आ चुके हैं। भारत में इन्हीं देशों में शामिल हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि भारत में इससे मरने वालों की संख्या थोड़ी कम है।भारत में प्लाज्मा थेरेपी के साथ दुनिया को कोरोनावायरस से ठीक होने की उम्मीद दी है, जिसके परीक्षण के परिणामों का इंतजार सभी लोगों को है।

इसके अलावा, लोगों में भी प्लाज्मा थेरेपी को लेकर तरह-तरह की बातें सुनने को मिलती हैं, जिन्हें दूर करके उन्हें इस थेरेपी की सही जानकारी देने की कोशिश करनी की सख्त जरूरत है। इस प्रकार, हमें उम्मीद है कि आपको इस लेख को पढ़ने के बाद इस थेरेपी से जुड़ी आवश्यक जानकारी मिली होगी, जो आपके मन में कोरोनावायरस के प्रति फैले डर को कम करने में सहायक साबित होगी।

सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवाल
Q1. प्लाज्मा थेरेपी के बाद किन चीज़ों का परहेज़ करना चाहिए?
Ans- प्लाज्मा थेरेपी कराने वाले लोगो को कुछ चीज़ों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
उन्हें हॉट बाथ, डॉक्टर की सलाह के बिना किसी दवाई का सेवन न करना, नशीले पदार्थों का सेवन न करना इत्यादि चीज़ों का परहेज़ करना चाहिए।
Q2. प्लाज्मा थेरेपी के बाद कौन-सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए?
Ans- जितना यह जानना जरूरी है कि प्लाज्मा थेरेपी के बाद किन चीज़ों का परहेज़ करना चाहिए, उतना यह जानना भी जरूरी है कि इस थेरेपी के बाद कौन-सी सावधानियाँ बरतनी चाहिए।
इस प्रकार, इस थेरेपी कराने वाले लोगों को धूप के संपर्क में न आना, भारी या मेहनत वाली एक्सराइज़ न करना, स्विमिंग न करना इत्यादि सावधानियाँ बरतनी चाहिए।
Q3. क्या पी आर पी थेरेपी से कैंसर फैलता है?
Ans- हालांकि,अभी तक ऐसा कोई मामला देखने को नहीं मिला है, कि पी आर पी से कैंसर हो।
इसके बावजूद, इसके बाद लोगों को सभी तरह की सावधानियों का पालन करना चाहिए ताकि उन्हें संभावित खतरों से बचा जा सके।
Q4. प्लाज्मा थेरेपी कितना कारगर होती है?
Ans- प्लाज्मा थेरेपी को लेकर अलग-अलग कथन देखने को मिलते हैं।
जहां एक ओर, कुछ अध्ययनों से पता चला है कि इस थेरेपी का लाभ सभी लोगों को नहीं मिलता है, तो वही दूसरी ओर, कुछ अध्ययनों से स्पष्ट है कि यह थेरेपी कम खतरनाक वाली है।
Q5. प्लाज्मा थेरेपी की सफलता दर कितनी है?
Ans- इस थेरेपी को कराने के 24 हफ्तों बाद लगभग 84 प्रतिशत लोगों में देखा गया है कि उनके दर्द में 25 प्रतिशत कमी आती है।
इस प्रकार, प्लाज्मा थेरेपी सफल प्रक्रिया है, यह कहना गलत नहीं होगा।
Q6. क्या पी आर पी के बाद एक्सराइज़ की जा सकती है?
Ans- पी आर पी इंजेक्शन लेने के 1 हफ्ते तक लोगों को आराम करना चाहिए। ऐसा करने किसी भी व्यक्ति के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है, इसलिए कुछ समय के लिए उन्हें एक्सराइज़ से परहेज़ करना चाहिए।
Q7. चेहरे के लिए प्लाज्मा थेरेपी के कितने सेशन की जरूरत होती है?
Ans- लोगों को प्लाज्मा थेरेपी के 4 हफ्ते अंतराल में 3-4 सेशन लेने पड़ सकते हैं। शुरूआती 4 सेशन के बाद डॉक्टर इस थेरेपी को कराने वाले लोगों को 6 महीने से 1 साल तक क्लीनिक पर बुलाते हैं, ताकि इस इलाज को सही तरीके से किया जा सके।

भारत भ्रमि तो विभिन्न घर्म,  संस्कृति,संत ,महात्मा, पीर - फकीर, देव - दुतों  शिक्षा विदों ,वैज्ञानिक, विचारको मिन्न मिन्न घर्म  - सम्प्राय मानने वाले का देश है। 1.30 करोड की पूजा चाठ ,यज्ञ हवन  दुआ ,प्रार्थना के आस्था है ,दिल्ली में सफल  परीक्षण के वाद कई राज्यसरकार फ्लाजमा थैरेपी का परीक्षण करने का प्रयत्न कर रही है, आशा की किरणों ,सफलता मिलेगी एक दिन ,करोना हारेगा, भारत जीतेगा

-  बिनोद तकिया वाला

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