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वोट बैंक की राजनीति में लीन हैं केजरीवाल- अशोक गोयल

कोरोना संकट के कारण हुए लॉकडाउन में सभी तरह के धार्मिक स्थल बंद है। ऐसे समय में दिल्ली के सभी धार्मिक स्थलों के पुजारियों को जीवन-यापन करने में समस्या आ रही हैं। इस संकट के समय में दिल्ली सरकार से दिल्ली के धार्मिक स्थलों के पुजारियों के लिए भी वेतन निर्धारित करने की मांग करते हुए लेकर दिल्ली भाजपा मीडिया प्रमुख व प्रवक्ता अशोक गोयल देवराहा ने कहा कि दिल्ली में मस्जिदों के इमाम और उनके सहायक को दिल्ली सरकार वेतन देती है लेकिन दिल्ली के अन्य धार्मिक स्थलों के पुजारियों को आज तक दिल्ली सरकार की ओर किसी भी तरह की आर्थिक सुविधा नहीं दी गई है। अभी ज़्यादातर मंदिरों, अन्य धार्मिक स्थलों के पुजारियों का खर्चा दान दक्षिणा, चढ़ावे के पैसे से चलता है और ये पैसा इतना कम होता है कि घर चलाना मुश्किल होता है। लॉकडाउन के दौरान मंदिर बंद होने से दान दक्षिणा और चढ़ावा आना बिल्कुल बंद हो गया है। ज़्यादातर मंदिरों के पुजारी बेहद दिक्कतों के साथ ज़िंदगी जी रहे हैं लेकिन अभी तक केजरीवाल सरकार ने उनकी सुध तक नहीं ली है।
श्री गोयल ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री कहते हैं कि वह तुष्टीकरण की राजनीति नहीं करते हैं लेकिन हकीकत ठीक इसके विपरीत है। उन्होंने बताया विधानसभा चुनाव से ठीक पहले केजरीवाल जी ने वेतन में भारी बढ़ोतरी करते हुए इमाम का वेतन 18 हज़ार रुपये और सहायक का वेतन 16 हज़ार रुपये कर दिया।

श्री गोयल ने कहा कि पहले भी कई बार इस मामले को लेकर दिल्ली सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की गई लेकिन धर्म की राजनीति करने वाले केजरीवाल ने कभी भी पुजारियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया। वोट बैंक की राजनीति में लीन केजरीवाल समय-समय पर मस्जिद के इमामों की वेतन को बढ़ाते रहें लेकिन इतने सालों में एक बार भी पुजारियों के वेतन को लेकर कोई चर्चा नहीं की। एक बार फिर दिल्ली सरकार से निवेदन है कि जिस तरह से मस्जिदों की इमामों को मासिक वेतन दिया जाता है उसी तर्ज पर दिल्ली के धार्मिक स्थलों के पुजारियों को भी वेतन देने का प्रावधान करें।

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