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दुनिया की 10 सबसे ऊंची इमारतें

दुनिया की 10 सबसे ऊंची इमारतें कौन सी है आइए देखते है इस वीडिओ में-

देखिए वीडियो-

-Maswood Ahmed
Amity University
Kolkata

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झारखंड का आदिवासी समाज और भूमि का उत्तराधिकार!

यूं तो झारखंड के आदिवासी समाज में औरतों की स्थिति, अन्य समाज की स्त्रियो की तुलना में पुरुष से संपत्ति के अधिकार की हो, तो ये उन सारी महिलाओं से पिछडी है जो अन्य क्षेत्रों में इनका अनुकरण करती है। आपको यह जानकर विस्मय होगा कि राज्य के जनजातीय समाज में महिलाओं को अचल संपत्ति में कोई वंशानुक्रम का अधिकार नहीं दिया जाता है। वर्तमान युग में, जब लैंगिक समानता का विषय विश्व भर में जोरों से चर्चा में है, यह अति अफसोसनाक है कि प्रदेश की आदिवासी महिलाओं को प्रथागत कानून के तहत भूमि के उत्तराधिकार से वंचित रखा गया है। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 कि धारा 7 एवं 8 में इस बात का उल्लेख है कि आदिवासी समाज में जमीन का उत्तराधिकार सिर्फ पुरुष वंश में ही किया जा सकता है। अर्थात, समाज की औरतों को इसका कतई अधिकार नहीं। हालांकि अधिनियम कि एक अन्य धारा पर गौर किया जाय तो यह मालूम होता  है कि यादि आदिवासी समाज में भूमि का हस्तांतरण, भेंट अथवा विनिमय किया जाना हो तो इसके लिए वंशानुगत पुरूष अथवा ‘अन्य ‘ योग्य है। जहां एक तरफ संथालपरगना के इलाके में ‘तानसेन जोम’ की परंपरा हैं, वही दूसरी तरफ संथालपरगना का

कोरोना काल में सुकून देने वाला भजन लॉन्च, पत्रकार से भजन गायक बने हरीश ने पूछा- तो क्या मेरा कोई कन्हैया नहीं

कोरोना के इस संकट काल में चारों ओर भय और निराशा का माहौल है। लोग डरे हुए हैं और डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। कष्ट की इस घड़ी में ताजा हवा के झोंके की तरह है वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हरीश चंद्र बर्णवाल का नया भजन। भगवान कृष्ण की तरह खूबसूरत है यह भजन- 'तो क्या मेरा कोई कन्हैया नहीं।' इस भजन को सुनकर आप अपने सारे गम भूल जाएंगे।

ग्लोबल डिस्मेंटल सत्र

नोटग्लोबल डिस्मेंटल हिंदुत्व के प्रत्युत्तर में इंडोलॉजी फाउंडेशन द्वारा दिल्ली के कांस्टिट्यूशन क्लब में बृहद प्रेस कॉन्फ्रेंस  का आयोजन किया गया जिसमें ग्लोबल डिस्मेंटल सत्र के दौरान उठाए गए प्रश्नों के बिंदुवार उत्तर दिए गए।

गांधी जी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करना वक्त की जरूरतः डॉ पार्थ शाह

थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के प्रेसिडेंट और इंडियन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के संस्थापक व डायरेक्टर डॉ पार्थ शाह ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के उस सपने को साकार करने को वक्त की जरूरत बताया है जिसके केंद्र में गांव और लोग शामिल हों। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मूल उद्देश्य लोकनीति निर्माण में लोक को शामिल करना है, लेकिन हमारे सिस्टम का दृष्टिकोण लोक को सहभागी मानने की बजाय उनके लिये बाध्यकारी नीतियां बनाने तक ही सिमट कर रह गया है।

धरती का सबसे छोटा बच्चा!

काका उदास थे। उदासी उनके पास कोई पड़ा कारण नहीं था। बदलती आबोहवा से जब भी परेशानी होती है, उदासी उनके चेहरे पर बैठ जाती है। जब कोई चिड़िया गीत गाती हुई फुर्र से उड़ती है या कोई वृक्ष तेज हवा में घूमने लगता है, तब जाकर उनका चेहरा सामान्य हो पाता है। वे बड़ी देर से चुप बैठे थे। जो व्यक्ति खुद में उतर रहा हो या सामने किसी दृश्य को टटोल रहा हो, उसे टोकना अच्छी बात नहीं है। मौन में भी मजे है। मैं कभी-कभी सोचने लगती हूं कि पृथ्वी पर चिड़िया कब आयी होगी। हठात काका का मौन टूटा। वे मुझसे पूछ रहे थे कि तुम्हें क्या लगता है, पृथ्वी पर मानव पहले आया होगा और बहुत दिनों के बाद जब वह बोर होने लगा होगा, तब चिड़िया बनायी गयी होगी! मुझे चुप देख कहने लगे कि मनुष्य के पास चिड़िया बनाने का कोई हुनर नहीं है। इतने उपकरण और होशियार हो जाने के बाद, अगर आज भी मानव चिड़िया बनाने बैठे तो असफलता ही हाथ लगेगी। इस बात से यह साबित होता है कि मानव बाद में आया होगा, चिड़िया पहले आयी होगी। वे कहने लगे कि वृक्ष चिड़िया का घर तो होता ही है, साथ ही उनका जीवन भी होता है। पृथ्वी पर पहले वृक्षों को लगाया गया होगा कि चिड़िया आ