Skip to main content

कोरोना काल में मिथिला पर विशेष ध्यान देने की मांग: विभय कुमार झा

बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसी समय में स्वयंसेवी संस्था अभ्युदय के राष्ट्रीय अध्यक्ष विभय कुमार झा ने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री श्री अश्विनी चौबे से बात की। बिहार विशेषकर मिथिला क्षेत्र में कोरोना को लेकर चिंता जाहिर करते हुए विभय कुमार झा ने कहा कि मिथिलावसियों के लिए केंद्र सरकार अपने स्तर पर विचार करें। यहां अस्पताल की पर्याप्त सुविधा नहीं है। जिस प्रकार से देश की राजधानी दिल्ली में केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया और कोरोना संक्रमण का दर कम हुआ है, उसी प्रकार बिहार में भी व्यवस्था होनी चाहिए।

अभ्युदय के राष्ट्रीय अध्यक्ष विभय कुमार झा ने बताया कि हमने केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे को अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया है। उन्होंने यथासमय समुचित व्यवस्था की बात कही है। विभय कुमार झा ने कहा कि बिहार सरकार अपने स्तर पर काम कर रही है। हम जैसे स्वंयसेवी लोग भी काम कर रहे हैं। मगर कोरोना संक्रमितों की संख्या जब मिथिला क्षेत्र में और बढेगी, तब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को हस्तक्षेप करना ही होगा। इसलिए हमने अपनी बात केंद्रीय मंत्री के सामने रखी है।

Comments

Most Popular

प्रवीण मिश्रा को दिल्ली में मिला मीडिया एक्सेलेंस का बेस्ट प्रोड्यूसर अवार्ड

बिहार के मधुबनी जिला में खजौली थाना के सुक्की गांव के प्रवीण कुमार मिश्रा को मीडिया में उत्कृष्ट योगदान के लिए मीडिया फेडरेशन ऑफ इंडिया के बेस्ट प्रोड्यूसर अवार्ड से सम्मानित किया गया है। प्रवीण कुमार मिश्रा को यह सम्मान मीडिया में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है।

ईमानदारी की श्रेष्ठता

अजीब स्वभाव है मानव का! हमारी भले ही ईमान से जान पहचान ना हो, पर हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति ईमानदार हों। व्यापार में, व्यवहार में , साहित्य में या संसार में सभी जगह ईमानदारी की मांग है।

कोरोना वायरस को भगाने के लिए ऐसे बढ़ाएं अपनी शक्ति

कोरोना वायरस से बचने के लिए जितना जरूरी लॉकडाउन है, उससे ज्यादा जरूरी है इस दौरान खान-पान का ध्यान रखना। प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए डॉक्टर पौष्टिक आहार की सलाह दे रहे हैं। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉक्टर एके सिंह ने बताया कि आयुष मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश को अगर लोग मान ले तो निश्चित तौर पर लोगों की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत मजबूत होगी। उन्होंने अपील की है कि लोग लॉकडाउन का पालन जरूर करें । आयुष मंत्रालय की सलाह- 1. पूरे दिन गर्म पानी पीते रहे। 2. नियमित रूप से कम से कम 30 मिनट तक योगासन, प्राणायाम और ध्यान करें। 3. घर में मौजूद हल्दी, जीरा, धनिया और लहसुन आदि मसालों का इस्तेमाल भोजन बनाने में जरूर करें। 4. जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम है, वह चवनप्राश का सेवन करें। 5. तुलसी, दालचीनी, कालीमिर्च, सोंठ पाउडर और मुनक्के (नहीं है तो सूखी अदरक को पीसकर चूर्ण बना लें) से बनी काली चाय को दिन में एक से दो बार पिएं। 6. चाय में चीनी के बजाय गुड़ का उपयोग करें। इससे बेहतर बनाने के लिए नींबू के रस भी मिला सकते हैं। 7. सुबह और शाम दोनों नथुनों में तेल या नारियल का तेल या फिर घ

झारखंड का आदिवासी समाज और भूमि का उत्तराधिकार!

यूं तो झारखंड के आदिवासी समाज में औरतों की स्थिति, अन्य समाज की स्त्रियो की तुलना में पुरुष से संपत्ति के अधिकार की हो, तो ये उन सारी महिलाओं से पिछडी है जो अन्य क्षेत्रों में इनका अनुकरण करती है। आपको यह जानकर विस्मय होगा कि राज्य के जनजातीय समाज में महिलाओं को अचल संपत्ति में कोई वंशानुक्रम का अधिकार नहीं दिया जाता है। वर्तमान युग में, जब लैंगिक समानता का विषय विश्व भर में जोरों से चर्चा में है, यह अति अफसोसनाक है कि प्रदेश की आदिवासी महिलाओं को प्रथागत कानून के तहत भूमि के उत्तराधिकार से वंचित रखा गया है। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 कि धारा 7 एवं 8 में इस बात का उल्लेख है कि आदिवासी समाज में जमीन का उत्तराधिकार सिर्फ पुरुष वंश में ही किया जा सकता है। अर्थात, समाज की औरतों को इसका कतई अधिकार नहीं। हालांकि अधिनियम कि एक अन्य धारा पर गौर किया जाय तो यह मालूम होता  है कि यादि आदिवासी समाज में भूमि का हस्तांतरण, भेंट अथवा विनिमय किया जाना हो तो इसके लिए वंशानुगत पुरूष अथवा ‘अन्य ‘ योग्य है। जहां एक तरफ संथालपरगना के इलाके में ‘तानसेन जोम’ की परंपरा हैं, वही दूसरी तरफ संथालपरगना का

अच्छे स्वास्थ्य के लिए उचित आहार

मनुष्य का स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर होता है कि उसका आहार कैसा है। यदि आहार संतुलित हो तो बेहतर है, परंतु यदि शरीर में किसी तत्व की कमी है तो संतुलित आहार भी उसके लिए उचित आहार नहीं होगा। इसके लिए आपको शरीर की जरूरतों के मुताबिक आहार लेना चाहिए। विदेशों में परामर्श के लिए डाइटिशियन होते हैं जो डॉक्टर के भांति स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करते हैं, परंतु भारत में इस समय केवल बड़े हॉस्पिटल में ही आहार विशेषज्ञ होते हैं। स्वतंत्र प्रैक्टिस करने वाले आहार विशेषज्ञ केवल महानगरों में ही है। अगर आप डाइट के बारे किसी आम आदमी से पूछे तो उत्तर होगा कि पेट भर के खाओ और ठीक से पच जाए तो वही सही आहार है। अगर आप पूछे कि मोटापा कम करना है तो सीधा-साधा उत्तर मिलेगा कि कम खाओ और दबाकर काम करो। अपने आप वजन कम हो, छरहरा होना या बिना कमजोरी के वजन कम करना उतना आसान नहीं है, जितना आसान प्रतीत होता है, फिर भी यह कार्य कठिन भी नहीं है। प्रत्येक मनुष्य की शारीरिक क्षमता, पाचन शक्ति और जीवनशैली का भी आहार से सीधा संबंध होता है। इसलिए आहार का चुनाव करते समय इस बात का सदैव ध्यान रखें।। 1. प्रोटीनयुक्त भोजन करें: प