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बरसात के मौसम में सीजनल फ्लू और बैक्टीरिया से दूर रहने के लिए अपने पीने के पानी का रखें खास ध्यान

कोरोनावायरस (कोविड-19) महामारी के इस बेहद चुनौतीपूर्ण दौर में हम लगातार मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और ऐसे में पीने के स्वच्छ पानी तक पहुंच और भी अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। ये जानना जरूरी है कि कोविड-19 से बचाव के उपायों में सुरक्षित पेयजल भी एक महत्वपूर्ण उपाय है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार,, पीने का साफ पानी और सैनिटेशन यानि स्वच्छता तक पहुंच दुनिया भर में अरबों लोगों के लिए आसान नहीं है। दुनिया भर में लगभग 2.2 बिलियन लोगों के पास सुरक्षित रूप से प्रबंधित पेयजल सेवाओं तक पहुंच नहीं है, जबकि 4.2 बिलियन लोगों के पास स्वच्छता सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं और 3 बिलियन लोग बुनियादी तौर पर हाथ धोने की सुविधा से भी वंचित हैं।

इसके अलावा बारिश के मौसम में इस संबंध में और भी सतर्क और सावधान रहना जरूरी हो जाता है। इस तथ्य के बावजूद कि मॉनसून का मौसम आ चुका है क्योंकि कम तापमान काफी लोगों को राहत प्रदान करता है, वहीं काफी लोगों के लिए ये बहुत स्वस्थ महीना नहीं है। यह बल्कि एक खतरनाक अवधि है क्योंकि मौसम के परिवर्तन से स्वास्थ्य चिंताएं बढ़ सकती हैं; नम मौसम, उच्च आर्द्रता और संक्रमण, काफी सारे लोगों के लिए हालात मुश्किल बना देते हैं। देश भर में प्रयोगशालाओं, क्लीनिकों और अस्पतालों के लिए मानसून हमेशा एक व्यस्त मौसम के रूप में दर्ज किया गया है, क्योंकि इसमें अवांछित और हानिकारक वायरस और बीमारियां आती हैं जो विभिन्न रूपों में आम आदमी को अपनी चपेट में लेने में कोई कसर नहीं छोड़ती हैं।

मॉनसून के दौरान व्यापक रूप से फैलने वाली सामान्य बीमारियां आम सर्दी, वायरल संक्रमण, इन्फ्लूएंजा, निमोनिया, मलेरिया, डेंगू, दस्त, गैस्ट्रोएंटेराइटिस, टाइफाइड और हेपेटाइटिस या पीलिया हैं। यह ज्यादातर दूषित पानी के कारण होता है और क्योंकि हमारे शरीर का 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से बना होता है, इसलिए सभी लोगों को ये जरूरी सलाह दी जाती है कि हम मॉनसून में अपने लिए सुरक्षित और स्वस्थ पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करें।

मानव स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाए रखना हर समय ही महत्वपूर्ण होता है, पर वर्तमान में जिस तरह से कोरोना का दौर चल रहा है, ऐसे में स्वास्थ्य का ख्याल रखना और भी जरूरी हो जाता है। इसके अलावा, हवा में नमी, गंदगी का माहौल और बुनियादी निवारक उपायों का पालन न करना जोखिम को और भी बढ़ा देता है।

दूषित पानी से पैदा होने वाले रोग विशेष रूप से हमारे घरों में अपना रास्ता बनाते हैं और हमारी इम्युन क्षमता पर हमला करते है। इन सब के चलते ही इस सीजन में हम इन सभी सीजनल बीमारियों का शिकार बनते हैं। इसलिए, मॉनसून के दिनों में हम सभी के लिए ये आवश्यक है कि हम अपने स्वास्थ्य का अतिरिक्त ध्यान रखें। यदि हमारे शरीर की रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता अपने चरम पर नहीं है, तो मौसम के परिवर्तन से संक्रमण हो सकता है। हालांकि, पानी से होने वाली बीमारियों को उचित स्वच्छता, व्यक्तिगत स्वच्छता और विशेष रूप से सुरक्षित पानी का सेवन करने पर ध्यान देकर नियंत्रित किया जा सकता है।

क्या समझने की जरूरत है कि माइक्रोबियल और आर्गेनिक कीटाणुओं को हमेशा हम अपनी समझ-बूझ से अपने से दूर नहीं रख सकते हैं। इसके साथ ही पारंपरिक तरीकों जैसे कि उबलते पानी या पानी को छानकर हम पानी में पैदा होने वाले रोगों से अपनी सुरक्षा कर सकते हैं क्योंकि इस तरह से पानी को छानकर कई तरह के प्रदूषकों से बचा नहीं जा सकता है, जिनमें एल्यूमीनियम, अमोनिया, आर्सेनिक और फ्लोराइड जैसे तत्व शामिल है। इस प्रकार के उपायों से इन से छुटकारा नहीं पाया जा सकता है। इसके अलावा हम आखिरी कितने दिनों तक बोलतबंद पानी खरीद सकते हैं? तो ऐसे में इस समस्या का एक दीर्घकालिक समाधान तलाश करें।

ठसके अलावा इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि सरकार अपने नागरिकों को स्वच्छ पानी मुहैया कराने के लिए क्या क्या कदम उठा रही है। आपको अपना काम खुद करना ही होगा और घर पर वाटर प्योरीफायर का उपयोग कर अपने घर पर उपयोग होने वाली पानी को साफ और शुद्ध करना होगा। एक अत्यधिक सावधानी उस पानी के साथ भी रखना जरूरी है, जिसका उपयोग आप रोजाना करते हैं क्योंकि यह दूषित हो सकता है। यदि खाना पकाने, धोने या नहाने के दौरान आप दूषित पानी का उपयोग कर रहे हैं तो भी कई तरह का संक्रमण फैल सकता है।

टापको एक सही वाटर प्योरीफायर को चुनने की जरूरत है और इसके लिए आपको एक वाटर एक्सपर्ट से पूछने की जरूरत है कि सही वाटर-प्योरीफिकेशन टेक्नोलॉजी क्या है और आपको अपने घर पर उपलब्ध पानी के अनुसार किस तरह के वाटर प्योरीफायर का उपयोग करना चाहिए। जब तक प्योरीफायर आपके घर के पानी के लिए अनुकूल नहीं होता है, तब तक यह उसके प्रदूषक तत्वों को शुद्ध करने में सक्षम नहीं होगा। आरओ $ यूवी $ यूएफ जैसी तकनीकें हैं जो न केवल पानी को शुद्ध करने में मदद करती हैं बल्कि कैल्शियम, मैग्नीशियम और जस्ता आदि जैसे सभी जरूरी खनिजों को भी पानी में बरकरार रखती हैं।

इसलिए, अपने और अपने परिवार के सदस्यों की अच्छी देखभाल करें और विशेष रूप से इस मानसून में सभी तरह के जोखिम से संघर्ष के लिए सुरक्षित रहें। मॉनसून के दौरान और हर दिन अपने प्रियजनों की सुरक्षा के लिए एक बेहतर होम वाटर प्योरीफायर में निवेश करने के बारे में महत्वपूर्ण निर्णय लें।


- डॉ.महेश गुप्ता,
सीएमडी,
केंट आरओ सिस्टम्स लिमिटेड

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कोरोना वायरस को भगाने के लिए ऐसे बढ़ाएं अपनी शक्ति

कोरोना वायरस से बचने के लिए जितना जरूरी लॉकडाउन है, उससे ज्यादा जरूरी है इस दौरान खान-पान का ध्यान रखना। प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए डॉक्टर पौष्टिक आहार की सलाह दे रहे हैं। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉक्टर एके सिंह ने बताया कि आयुष मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश को अगर लोग मान ले तो निश्चित तौर पर लोगों की प्रतिरोधक क्षमता मजबूत मजबूत होगी। उन्होंने अपील की है कि लोग लॉकडाउन का पालन जरूर करें ।

आयुष मंत्रालय की सलाह-
1. पूरे दिन गर्म पानी पीते रहे।
2. नियमित रूप से कम से कम 30 मिनट तक योगासन, प्राणायाम और ध्यान करें।
3. घर में मौजूद हल्दी, जीरा, धनिया और लहसुन आदि मसालों का इस्तेमाल भोजन बनाने में जरूर करें।
4. जिन लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम है, वह चवनप्राश का सेवन करें।
5. तुलसी, दालचीनी, कालीमिर्च, सोंठ पाउडर और मुनक्के (नहीं है तो सूखी अदरक को पीसकर चूर्ण बना लें) से बनी काली चाय को दिन में एक से दो बार पिएं।
6. चाय में चीनी के बजाय गुड़ का उपयोग करें। इससे बेहतर बनाने के लिए नींबू के रस भी मिला सकते हैं।
7. सुबह और शाम दोनों नथुनों में तेल या नारियल का तेल या फिर घी लगाए।

अच्छे स्वास्थ्य के लिए उचित आहार

मनुष्य का स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर होता है कि उसका आहार कैसा है। यदि आहार संतुलित हो तो बेहतर है, परंतु यदि शरीर में किसी तत्व की कमी है तो संतुलित आहार भी उसके लिए उचित आहार नहीं होगा। इसके लिए आपको शरीर की जरूरतों के मुताबिक आहार लेना चाहिए।

विदेशों में परामर्श के लिए डाइटिशियन होते हैं जो डॉक्टर के भांति स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस करते हैं, परंतु भारत में इस समय केवल बड़े हॉस्पिटल में ही आहार विशेषज्ञ होते हैं। स्वतंत्र प्रैक्टिस करने वाले आहार विशेषज्ञ केवल महानगरों में ही है।

अगर आप डाइट के बारे किसी आम आदमी से पूछे तो उत्तर होगा कि पेट भर के खाओ और ठीक से पच जाए तो वही सही आहार है। अगर आप पूछे कि मोटापा कम करना है तो सीधा-साधा उत्तर मिलेगा कि कम खाओ और दबाकर काम करो। अपने आप वजन कम हो, छरहरा होना या बिना कमजोरी के वजन कम करना उतना आसान नहीं है, जितना आसान प्रतीत होता है, फिर भी यह कार्य कठिन भी नहीं है। प्रत्येक मनुष्य की शारीरिक क्षमता, पाचन शक्ति और जीवनशैली का भी आहार से सीधा संबंध होता है। इसलिए आहार का चुनाव करते समय इस बात का सदैव ध्यान रखें।।
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