Skip to main content

मरुकिया अस्पताल परिसर की साफ-सफाई कर युवाओं ने पेश की मिसाल

कोरोना संकट काल में भले ही गांव-गली के साथ अस्पताल को स्वच्छ रखने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन मधुबनी के मरुकिया उप स्वास्थ्य केन्द्र परिसर में बरसात के दौरान जलजमाव के कारण चारों ओर गंदगी का सैलाब देखने को मिला। गंदगी के कारण कई तरह की बीमारी फैलने की आशंका होने बाद भी जब साफ-सफाई के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया तो इलाके के नौजवानों से इसकी जिम्मेदारी अपने कंधे पर ले ली। 
इलाकों के युवाओं ने पहल कर संगठित रूप से अस्पताल परिसर की सफाई की। इन युवाओं ने मरुकिया अस्पताल परिसर की साफ-सफाई कर एक मिसाल पेश की है।

परिसर की सफाई का प्रेरणादायक काम करने से लोग काफी खुश हैं। इलाके के लोगों का कहना है कि जो काम सरकार को करना चाहिए था उसे करने इन लोगों ने एक अच्छा काम किया है।

सफाई अभियान में योगदान देने बाले युवाओं में कपिल राय, राम उदगार महतो, राम सेवक महतो, कमलेश राय, राकेश राय, अभिषेक कुमार, धर्म कुमार साफी, विवेक राय, विनोद ठाकुर, मिथिलेश राय, अजय पूर्वे, अमीर राय, सुशील राय, गंगा महतो, मोहन महतो, भरत राय, नवीन राय, संजय राय शामिल हैं।

-लाल कुमार
मरुकिया, अंधराठाढ़ी, मधुबनी

Comments

Most Popular

झारखंड का आदिवासी समाज और भूमि का उत्तराधिकार!

यूं तो झारखंड के आदिवासी समाज में औरतों की स्थिति, अन्य समाज की स्त्रियो की तुलना में पुरुष से संपत्ति के अधिकार की हो, तो ये उन सारी महिलाओं से पिछडी है जो अन्य क्षेत्रों में इनका अनुकरण करती है। आपको यह जानकर विस्मय होगा कि राज्य के जनजातीय समाज में महिलाओं को अचल संपत्ति में कोई वंशानुक्रम का अधिकार नहीं दिया जाता है। वर्तमान युग में, जब लैंगिक समानता का विषय विश्व भर में जोरों से चर्चा में है, यह अति अफसोसनाक है कि प्रदेश की आदिवासी महिलाओं को प्रथागत कानून के तहत भूमि के उत्तराधिकार से वंचित रखा गया है। छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम, 1908 कि धारा 7 एवं 8 में इस बात का उल्लेख है कि आदिवासी समाज में जमीन का उत्तराधिकार सिर्फ पुरुष वंश में ही किया जा सकता है। अर्थात, समाज की औरतों को इसका कतई अधिकार नहीं। हालांकि अधिनियम कि एक अन्य धारा पर गौर किया जाय तो यह मालूम होता  है कि यादि आदिवासी समाज में भूमि का हस्तांतरण, भेंट अथवा विनिमय किया जाना हो तो इसके लिए वंशानुगत पुरूष अथवा ‘अन्य ‘ योग्य है। जहां एक तरफ संथालपरगना के इलाके में ‘तानसेन जोम’ की परंपरा हैं, वही दूसरी तरफ संथालपरगना का

गांधी जी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करना वक्त की जरूरतः डॉ पार्थ शाह

थिंकटैंक सेंटर फॉर सिविल सोसायटी के प्रेसिडेंट और इंडियन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के संस्थापक व डायरेक्टर डॉ पार्थ शाह ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के उस सपने को साकार करने को वक्त की जरूरत बताया है जिसके केंद्र में गांव और लोग शामिल हों। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मूल उद्देश्य लोकनीति निर्माण में लोक को शामिल करना है, लेकिन हमारे सिस्टम का दृष्टिकोण लोक को सहभागी मानने की बजाय उनके लिये बाध्यकारी नीतियां बनाने तक ही सिमट कर रह गया है।

पर्शियन रामायण की विरासत पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

"रामायण की सचित्र पर्शियन मैन्युस्क्रिप्ट्स" विषय पर एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ लवकुश द्विवेदी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित "रामायण की सचित्र पर्शियन मैन्युस्क्रिप्ट्स" विषय पर इंडोलोजी फाउंडेशन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में मलेशिया से डॉ रामिन, ईरान से डॉ आमिर तथा मारिशस से शैलेन रामकिसुन शामिल हुए। भारत से पुरातत्वविद डॉ बीआर मणि एवं कला इतिहास के मर्मज्ञ प्रो दीनबंधु पांडेय समीक्षा पैनल में शामिल रहें।  

ईमानदारी की श्रेष्ठता

अजीब स्वभाव है मानव का! हमारी भले ही ईमान से जान पहचान ना हो, पर हम चाहते हैं कि हमारे संपर्क में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति ईमानदार हों। व्यापार में, व्यवहार में , साहित्य में या संसार में सभी जगह ईमानदारी की मांग है।

अंतरराष्ट्रीय अग्रवाल सम्मेलन की कार्यकारिणी बैठक संपन्न

अंतर्राष्ट्रीय अग्रवाल सम्मेलन द्वारा आयोजित कार्य कारिणी समिति की बैठक का आयोजन मुबंई के अंधेरी वेस्ट में किया गया। इस बैठक में समिति द्वारा भविष्य में किए जाने वाले अनेक कार्यों की समीक्षा की गई तथा विशेष रुप से अग्रवाल समाज में वैवाहिक संबंधों के चयन की प्रक्रिया को किस तरह सुगम किया जाए इस पर विस्तार में चर्चा की गई।