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कोविड के नए वैरियेंट और वर्ष 2020 में बनी आंतरिक इम्युनिटी में समय पूर्व आई कमी विज्ञान के लिए चुनौती

कैंब्रिज विश्व विद्यालय के इम्युनोलोजी एवं इन्फ़ेक्सन्श डिसीज के विशेषज्ञ प्रो डॉ रवीन्द्र गुप्ता जो कि टाइम मैगजीन के प्रथम सौ प्रभावशाली लोगो की सूची में शामिल हैं, उन्होंने इंडोलोजी फ़ाउंडेशन द्वारा आयोजित ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में भारत में कोरोना की दूसरी लहर की समस्या पर चेतावनी दी है कि कोरोना वायरस के नए वैरियेंट्स

उदाहरण के तौर पर बी.1.617 वैरियेंट नौजवानों को संक्रमित करने के साथ मानव के इम्य़ून सिस्टम को भेद कर बीमार करने की क्षमता रखते हैं, इस तरह के वैरियेंट गंभीर चिंता का विषय हैं, उन्होंने व्यवस्था को आगाह करते हुये तेज वैक्सीनेशन के साथ प्रभावी एंटी वायरल ड्रग्स के विकास एवं संक्रमण की चैन तोड़ने पर बल दिया।

डॉ वीर पुष्पक एवं डॉ ज्ञानेश्वर चौबे के संयुक्त प्रश्न के उत्तर में उन्होंने इस दावे को खारिज कर दिया कि कोविड का वायरस चीन की लैब में निर्मित नहीं हुआ होगा, उन्होंने कहा कि इस विषय पर आगे अनुसंधान की जरूरत है क्योंकि चीन की लैब अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर चौथे मानक स्तर पर संचालित होती है जोकि वर्षों से कोविड वायरस जैसे वायरसों पर कार्य कर रही थी, इस पर कार्यक्रम के संचालक ललित मिश्र ने वुहान लैब द्वारा पूर्व में प्रकाशित एक ऐसे पेपर की ओर ध्यान आकृष्ट किया।


बीएचयू के जैवविज्ञान के प्रोफ़ेसर डॉ ज्ञानेश्वर चौबे ने इस अवसर पर बताया कि उनके द्वारा किये गये सीरम सर्वेक्षण के द्वारा सामने आया है कि 2020 में संक्रमित हुये लोगों में निर्मित एंटीबाडीस समय से पूर्व ही खत्म हो गयी हैं जिसके कारण, कोरोना की दूसरी लहर के दौरान संक्रमित जनता को आंतरिक सुरक्षा प्राप्त नहीं हो पाई जिसके कारण गंभीर स्थिति निर्मित हो गयी, इस पर आगे विचार रखते हुये जसलोक चिकित्सा संस्थान के रिसर्च डाइरेक्टर डॉ राजेश पारीख ने तेजी से होने वाले म्यूटेशंस के कारण इम्युनिटी बनाये रखने हेतु वैक्सीन के वार्षिक बूस्टर डोज बनाने की जरूरत पर ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम के संचालक ललित मिश्र ने ग्रामीण क्षेत्रो में जहां संसाधन कम हैं वहां रोगमृत्यु दर कम रखने हेतु पत्तल पर भोजन एवं आंगनबाड़ी तथा आशा कार्यकर्ताओ द्वारा प्राथमिक अवस्था जैसे ऑक्सीजन स्तर नापने की सुविधा प्रदान करने की बात रखी जिसके लिये जनप्रतिनिधियों को आगे आना चाहिये

डॉ पारीख ने सस्ते एवं प्रभावी इलाज हेतु सही समय पर चिकित्सकों द्वारा स्टेरायड्स के प्रयोग पर भी बल दिया जिसका समर्थन ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस के कोविड विशेषज्ञ डॉ वीर पुष्पक ने किया, डॉ वीर पुष्पक ने सोशल मीडिया में व्याप्त वहम कि हजारों वर्षों से चलती आ रही भारतीय इम्युनिटी बहुत मजबूत है, से बाहर निकलकर विज्ञान के आधार पर वायरस का मुकाबला करने की बात रखी ।

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