महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से रोजगार बाजार में नई रफ्तार, बेरोजगारी दर में आई गिरावट
देश के रोजगार मोर्चे से एक राहत भरी खबर आई है। अक्टूबर–दिसंबर 2025 तिमाही में श्रम बाजार के कई अहम संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया है। खासकर महिलाओं की श्रम बल में बढ़ती भागीदारी ने तस्वीर को और सकारात्मक बनाया है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों की श्रम बल सहभागिता दर (LFPR) बढ़कर 55.8 प्रतिशत हो गई है। पिछली तिमाही में यह 55.1 प्रतिशत थी।
यानी ज्यादा लोग अब काम की तलाश में हैं या काम कर रहे हैं। इसे रोजगार बाजार में बढ़ते भरोसे के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
सबसे अहम बात महिलाओं को लेकर सामने आई है। 15 साल और उससे अधिक उम्र की महिलाओं की श्रम बल सहभागिता दर बढ़कर 34.9 प्रतिशत हो गई है। पिछली तिमाही में यह 33.7 प्रतिशत थी।
ग्रामीण इलाकों में यह बढ़ोतरी और ज्यादा साफ दिखाई देती है। वहां महिलाओं की श्रम भागीदारी दर 37.5 प्रतिशत से बढ़कर 39.4 प्रतिशत पहुंच गई है। शहरी इलाकों में यह दर लगभग स्थिर रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वयं सहायता समूहों, छोटे व्यवसायों और ग्रामीण रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी से महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है।
सिर्फ भागीदारी ही नहीं, काम करने वालों की वास्तविक संख्या भी बढ़ी है। 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों का श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) 52.2 प्रतिशत से बढ़कर 53.1 प्रतिशत हो गया है।
इसका मतलब साफ है—काम करने वालों की हिस्सेदारी बढ़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह सुधार ज्यादा देखने को मिला है।
महिलाओं के श्रमिक जनसंख्या अनुपात में भी लगातार सुधार दर्ज किया गया है। यह संकेत देता है कि महिलाएं सिर्फ काम की तलाश में ही नहीं हैं, बल्कि उन्हें रोजगार भी मिल रहा है।
बेरोजगारी दर में भी गिरावट आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 4.4 प्रतिशत से घटकर 4.0 प्रतिशत हो गई है। यह गिरावट पुरुषों और महिलाओं दोनों में देखी गई है।
शहरी क्षेत्रों में भी बेरोजगारी दर 6.9 प्रतिशत से घटकर 6.7 प्रतिशत हो गई है। खास तौर पर शहरी पुरुषों की बेरोजगारी दर में कमी आई है।
स्वरोजगार के मोर्चे पर भी हल्की लेकिन सकारात्मक बढ़ोतरी हुई है। ग्रामीण इलाकों में स्वरोजगार से जुड़े लोगों की हिस्सेदारी 62.8 प्रतिशत से बढ़कर 63.2 प्रतिशत हो गई है।
शहरी क्षेत्रों में भी स्वरोजगार 39.3 प्रतिशत से बढ़कर 39.7 प्रतिशत हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि लोग नौकरी के साथ-साथ अपना काम शुरू करने की ओर भी बढ़ रहे हैं।
ग्रामीण भारत में रोजगार का बड़ा आधार अभी भी कृषि क्षेत्र ही बना हुआ है। अक्टूबर–दिसंबर 2025 के दौरान 58.5 प्रतिशत ग्रामीण श्रमिक कृषि से जुड़े रहे। पिछली तिमाही में यह 57.7 प्रतिशत था।
वहीं शहरी भारत में सेवा क्षेत्र यानी तृतीयक क्षेत्र का दबदबा कायम है। करीब 61.9 प्रतिशत शहरी श्रमिक इसी क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
सरकारी अनुमान के मुताबिक, देश में काम करने वालों की कुल संख्या भी बढ़ी है। जुलाई–सितंबर 2025 में जहां औसतन 56.2 करोड़ लोग काम कर रहे थे, वहीं अक्टूबर–दिसंबर 2025 में यह संख्या बढ़कर 57.4 करोड़ हो गई।
इनमें 40.2 करोड़ पुरुष और 17.2 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। यह आंकड़ा बताता है कि कुल मिलाकर रोजगार के अवसर बढ़े हैं।
गौरतलब है कि जनवरी 2025 से PLFS सर्वे की पद्धति में बदलाव किया गया है। अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के मासिक और त्रैमासिक आंकड़े वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) के आधार पर जारी किए जा रहे हैं।
पहले दिसंबर 2024 तक सिर्फ शहरी क्षेत्रों के त्रैमासिक आंकड़े जारी होते थे। अप्रैल–जून 2025 से ग्रामीण आंकड़ों को भी शामिल किया गया है। अक्टूबर–दिसंबर 2025 इस नई श्रृंखला का तीसरा बुलेटिन है।
नई पद्धति से श्रम बाजार की तस्वीर ज्यादा साफ और नियमित रूप से सामने आ रही है। इससे नीति निर्माण में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, ताजा आंकड़े संकेत देते हैं कि रोजगार बाजार में धीरे-धीरे मजबूती आ रही है। महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, बेरोजगारी दर में गिरावट और काम करने वालों की बढ़ती संख्या—ये तीनों संकेत अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माने जा रहे हैं।
हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि गुणवत्ता वाले रोजगार और शहरी क्षेत्रों में स्थायी अवसर बढ़ाना अगली बड़ी चुनौती होगी।
फिलहाल, अक्टूबर–दिसंबर 2025 के आंकड़े रोजगार के मोर्चे पर राहत की खबर जरूर लेकर आए हैं।
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