भारत-UAE के बीच ऐतिहासिक दोस्ती: 2032 तक व्यापार को $200 बिलियन पहुंचाने का लक्ष्य

भारत और संयुक्त अरब अमीरात- UAE के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने 19 जनवरी को भारत की अपनी आधिकारिक यात्रा की। प्रोटोकॉल तोड़ते हुए पीएम मोदी ने खुद एयरपोर्ट जाकर अपने 'भाई' का गर्मजोशी से स्वागत किया।


दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का सबसे बड़ा आकर्षण आर्थिक लक्ष्य रहा। पिछले दो वर्षों में व्यापार 100 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। अब दोनों देशों ने इसे साल 2032 तक दोगुना यानी 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर करने का महा-लक्ष्य रखा है। इसके लिए दोनों देशों के छोटे उद्योगों (MSMEs) को आपस में जोड़ा जाएगा।


UAE अब गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन के विकास में बड़ी भूमिका निभाएगा। यहां एक इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पायलट ट्रेनिंग स्कूल, ग्रीनफील्ड पोर्ट और स्मार्ट टाउनशिप बनाने पर चर्चा हुई। साथ ही, GIFT City में दुबई के 'डीपी वर्ल्ड' और 'फर्स्ट अबू धाबी बैंक' की शाखाएं खुलने से निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।

भारत और UAE अब सिर्फ जमीन पर ही नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में भी साथ काम करेंगे। दोनों देशों ने एक 'इंटीग्रेटेड स्पेस इकोसिस्टम' बनाने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने और डिजिटल दूतावास की संभावनाओं पर भी काम शुरू होगा।

ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और ADNOC गैस के बीच 10 साल का करार हुआ है, जिसके तहत 2028 से हर साल 0.5 मिलियन टन गैस की सप्लाई होगी। साथ ही, 'शांति' (SHANTI) कानून के तहत दोनों देश अब छोटे परमाणु रिएक्टर (SMRs) और उन्नत परमाणु तकनीक पर भी साथ मिलकर काम करेंगे।

अबू धाबी में अब 'हाउस ऑफ इंडिया' बनाया जाएगा, जो दोनों देशों की दोस्ती का प्रतीक होगा। शिक्षा के क्षेत्र में IIT दिल्ली और IIM अहमदाबाद के बाद अब स्कूलों में भी नवाचार लैब शुरू की जाएंगी। साथ ही, भारत के 'डिजीलॉकर' को UAE के प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा जाएगा, ताकि छात्रों के डॉक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन चुटकियों में हो सके।

रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर दोनों नेताओं ने सीमा पार आतंकवाद की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी देश को आतंकियों को पनाह या फंडिंग नहीं देनी चाहिए। दोनों देशों ने एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी की दिशा में भी कदम बढ़ा दिए हैं।

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