केवटी प्रखंड मुख्यालय में हरे पेड़ों की अवैध कटाई का मामला गहराया, जांच के घेरे में अधिकारी
केवटी (दरभंगा): बिहार के दरभंगा जिले के केवटी प्रखंड मुख्यालय परिसर से बेशकीमती और पुराने पेड़ों की अवैध कटाई का मामला अब एक बड़े प्रशासनिक घोटाले का रूप लेता जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से लगातार स्थानीय समाचार पत्रों (प्रभात खबर, दैनिक भास्कर, जागरण) में छप रही खबरों ने वन विभाग और जिला प्रशासन के बीच हड़कंप मचा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला केवटी प्रखंड मुख्यालय के पास लगे लगभग 50 वर्ष पुराने सिरिष्ठ के पेड़ से शुरू हुआ। खबरों के मुताबिक:
• अवैध कटाई: बिना वन विभाग की अनुमति और बिना किसी आधिकारिक निविदा (Tender) के, इस विशाल पेड़ को गुपचुप तरीके से काट दिया गया।
• लकड़ी की चोरी: आरोप है कि पेड़ काटने से पहले उसकी एक विशाल टहनी को करीब 20 दिन पहले ही काटकर गायब कर दिया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि पेड़ के मुख्य हिस्सों को काटकर ट्रैक्टरों पर लादकर निजी आरा मशीनों पर भेज दिया गया।
• साक्ष्यों को छिपाने की कोशिश: पेड़ कटने के बाद उसके ठूंठ को पीली बोरी से ढक दिया गया था ताकि किसी की नजर न पड़े।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और विरोधाभास
इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) चंद्रमोहन पासवान का बयान विवादों में है। उन्होंने शुरुआत में कहा कि पेड़ पुराना था और गिर गया था, इसलिए उसे कटवाकर सुरक्षित रखा गया है और अब निविदा की प्रक्रिया की जाएगी। हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि अगर प्रक्रिया अब होनी है, तो पेड़ पहले क्यों काटा गया और उसकी टहनियां कहां गायब हो गईं?
वन विभाग की सक्रियता और 'मीडिया इम्पैक्ट'
समाचार पत्रों में खबर प्रमुखता से छपने के बाद वन विभाग ने संज्ञान लिया है:
• जांच टीम: वन प्रमंडल पदाधिकारी (DFO) के आदेश पर क्षेत्रीय रेंजर हेमकांत झा ने जांच शुरू की है।
• मौका मुआयना: वन उप परिसर पदाधिकारी मुकेश कुमार और फॉरेस्टर काजल कुमारी ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। जांच में पाया गया कि परिसर में रखे लकड़ी के टुकड़ों की संख्या और पेड़ के असल आकार में विसंगति है।
• पुष्टि: रेंजर हेमकांत झा ने स्वीकार किया कि पेड़ काटने में घोर अनियमितता बरती गई है और वन विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
मामला हुआ हाई-प्रोफाइल: मनरेगा भवन के पीछे भी हुई कटाई
ताजा खबरों (16-17 फरवरी 2026) के अनुसार, यह केवल एक पेड़ तक सीमित नहीं है। मनरेगा भवन के पीछे से भी एक और मोटे पेड़ को काटकर गायब करने की बात सामने आई है। सामाजिक कार्यकर्ता मो. इकबाल अंसारी ने वरीय पुलिस अधीक्षक और वन विभाग को आवेदन देकर सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि चोरी छिपे लकड़ी ले जाते वाहनों की पहचान हो सके।
विधायक का रुख:
केवटी विधायक मुरारी मोहन झा ने भी इस मामले पर संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकारी संपत्ति की इस तरह लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल जांच रिपोर्ट का इंतजार है। स्थानीय ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि जिन अधिकारियों पर सरकारी संपत्ति की रक्षा का जिम्मा है, उन्हीं की देखरेख में दशकों पुराने पेड़ 'साफ' कर दिए गए।
-केवटी पत्रकारों की टोली









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