मजबूरी नहीं, मजबूत इरादों वाला भारत': ET Now ग्लोबल बिजनेस समिट में पीएम मोदी का हुंकार
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी को नई दिल्ली में आयोजित 'ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट 2026' को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था, भारत के आर्थिक सुधारों और भविष्य के रोडमैप पर विस्तार से बात की। समिट का विषय ‘व्यवधानों का दशक, परिवर्तन की शताब्दी’ (Decade of Disruptions, Century of Transformation) रखा गया था।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में साफ कहा कि पिछला दशक दुनिया के लिए उथल-पुथल भरा रहा, लेकिन भारत ने इन चुनौतियों को अवसर में बदला है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है और वैश्विक विकास में 16% से अधिक का योगदान दे रहा है।
मजबूरी के सुधार बनाम भरोसे के सुधार
पीएम मोदी ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले सुधार केवल तब किए जाते थे जब देश के पास कोई और रास्ता नहीं बचता था। उन्होंने 1991 के आर्थिक संकट का उदाहरण देते हुए कहा कि तब सोना गिरवी रखना पड़ा था, तब जाकर रिफॉर्म्स हुए।
"हमारी सरकार मजबूरी में नहीं, बल्कि मिशन मोड में काम करती है। आज के सुधार किसी संकट के दबाव में नहीं, बल्कि देश को सशक्त बनाने के दृढ़ निश्चय से लिए जा रहे हैं।"उन्होंने बताया कि कैसे पहले फाइलें महीनों तक अटकी रहती थीं, लेकिन अब तकनीक के इस्तेमाल से निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया गया है।
UPI और डिजिटल क्रांति: दुनिया के लिए मिसाल
प्रधानमंत्री ने डिजिटल इंडिया और UPI की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक ऐप नहीं, बल्कि एक बड़ा नीतिगत बदलाव है। इसने उन लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाई हैं जो पहले सिस्टम से बाहर थे। उन्होंने कहा कि यह 'सबके लिए एक ही तरीका' (One size fits all) वाली पुरानी वैश्विक सोच को चुनौती देने जैसा है।
राज्यों की ताकत और बुनियादी ढांचा
आंकड़ों का हवाला देते हुए पीएम ने बताया कि 2014 से 2025 के बीच राज्यों को मिलने वाले टैक्स के हिस्से में भारी बढ़ोतरी हुई है। जहां 2004-14 के बीच राज्यों को 18 लाख करोड़ मिले थे, वहीं उनकी सरकार के दौरान यह आंकड़ा 100 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने वाला है। इसके अलावा, इंफ्रास्ट्रक्चर पर 17 लाख करोड़ रुपये के खर्च और 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर जैसी योजनाओं से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
2047 का लक्ष्य: विकसित भारत का सपना
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए मोदी ने कहा कि कुछ लोग पूछते हैं कि हम 2047 की बात क्यों करते हैं? उन्होंने तर्क दिया कि अगर हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने भविष्य का सपना न देखा होता, तो हमें आजादी कभी नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी का कर्तव्य है कि वह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक समृद्ध भारत छोड़कर जाए।
AI और भविष्य की तैयारी
आने वाले समय में तकनीक की भूमिका पर बात करते हुए पीएम ने 'ग्लोबल एआई इम्पैक्ट समिट' की घोषणा की। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इसमें क्रांतिकारी बदलाव लाएगा, जिसके लिए भारत पूरी तरह तैयार है।

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