महाशिवरात्रि पर राजधानी बनी शिवमय, भक्ति की बीट्स पर झूमा दिल्ली
नई दिल्ली: जब बेस ड्रम की थाप मंदिर की घंटियों से मिलती है, तो असर सीधा दिल पर होता है। राजधानी के Jawaharlal Nehru Stadium में कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला। ‘बिगेस्ट महाशिवरात्रि भजन जैमिंग नाइट’ ने पूरे स्टेडियम को भक्ति के विशाल धाम में बदल दिया।
10 हजार से ज़्यादा श्रद्धालु, एक ही स्वर
भगवान शिव और माता पार्वती की महानिशा इस बार सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं रही। करीब दस हजार लोग एक साथ जुटे और माहौल “ॐ नमः शिवाय” के जयघोष से गूंज उठा। डेनिम पहने युवा हों या पारंपरिक कपड़ों में बुजुर्ग—हर कोई एक ही रंग में रंगा नजर आया।
गंगा आरती से हुई शुरुआत
शाम 6 बजे जैसे ही गंगा आरती की पहली लौ जली, माहौल पूरी तरह बदल गया। भीड़ अब भीड़ नहीं रही, एक परिवार बन गई। हर चेहरा भक्ति में डूबा दिखा।
संगीत ने बांधा समां
मंच पर सुहास सावंत ने “जय महाकाल” से ऐसा रंग जमाया कि पूरा स्टेडियम झूम उठा। इसके बाद गजेंद्र प्रताप सिंह ने “कैलाश में निवासी” और “दूल्हा बने हैं बाबा” जैसे भजनों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हाथ हवा में, आंखें बंद, और दिल शिव के नाम—यह ‘भजन क्लबिंग’ का अनोखा रूप था।
तीर्थों से सीधा जुड़ाव
आयोजकों ने श्रद्धालुओं को Kashi Vishwanath Temple की विभूति और Pashupatinath Temple का 5 मुखी सिद्ध रुद्राक्ष भेंट किया। इससे देश-विदेश के पवित्र धामों से जुड़ाव का खास एहसास मिला।
परंपरा और टेक्नोलॉजी साथ-साथ
प्रसाद बॉक्स के साथ वाया वेदा ऐप और वेब प्लेटफॉर्म पर ज्योतिष परामर्श के लिए 100 रुपये का वॉलेट बैलेंस भी दिया गया। यह पहल दिखाती है कि कैसे आध्यात्मिकता को डिजिटल युग में भी सहज बनाया जा सकता है।
संस्थापक काजल बिहानी की भावुक प्रतिक्रिया
वाया वेदा की संस्थापक काजल बिहानी ने इस मौके पर कहा कि हजारों लोगों को एक साथ मंत्रों में डूबते देखना उनके लिए सपने के सच होने जैसा था। उनके मुताबिक, नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ रही है और यही सबसे बड़ी जीत है।
एक नई शुरुआत की आहट
आधी रात के बाद जब अंतिम मंत्र गूंजे और सन्नाटा छाया, तो वह खामोशी भी खास थी। कुछ घंटों के लिए ही सही, दिल्ली ने अपनी विरासत को पूरे गर्व से जिया। महाशिवरात्रि की यह रात राजधानी के आध्यात्मिक इतिहास में खास जगह बना गई।


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