केवटी प्रखंड मुख्यालय में लकड़ी घोटाला! आधा दर्जन सरकारी पेड़ गायब, रडार पर अफसर
केवटी (दरभंगा): दरभंगा के केवटी प्रखंड मुख्यालय परिसर में सरकारी पेड़ों की अवैध कटाई का मामला अब एक बड़े प्रशासनिक स्कैंडल में तब्दील हो गया है। ताजा खुलासे के मुताबिक, परिसर से केवल एक नहीं, बल्कि आधा दर्जन छोटे-बड़े बेशकीमती पेड़ काटकर गायब कर दिए गए हैं। इस घटना ने प्रखंड प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नए तथ्यों का खुलासा: एक नहीं, कई पेड़ हुए साफ
स्थानीय सूत्रों और मौके पर मौजूद साक्ष्यों से मिली नई जानकारी के अनुसार:
• व्यापक कटाई: प्रखंड मुख्यालय और मनरेगा भवन के पीछे स्थित खेतों के पास से आधा दर्जन पेड़ काट दिए गए हैं। मौके पर अब केवल पेड़ों के ठूंठ (जड़) बचे हैं।
• ताजा साक्ष्य: घटना स्थल पर बिखरे लकड़ी के छोटे टुकड़े और ताजा बुरादा चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं कि यह कटाई हाल ही में की गई है।
• ट्रैक्टर से ढुलाई: प्रत्यक्षदर्शियों और जानकारों का दावा है कि बिना किसी वन विभाग की अनुमति के, पेड़ों को काटकर ट्रैक्टरों पर लादकर अवैध रूप से गंतव्य स्थानों पर भेज दिया गया।
बीडीओ पर सीधा आरोप और जांच की कछुआ चाल
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब सामाजिक कार्यकर्ता मो. इकबाल अंसारी ने सीधे बीडीओ चंद्र मोहन पासवान को इस अवैध कटाई का जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए वन विभाग को आवेदन दिया।
• धीमी जांच पर सवाल: वन विभाग ने 5 दिन पहले ही जांच का आदेश दिया था और फॉरेस्टर काजल कुमारी को रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी थी। लेकिन, आरोप है कि मामला 'हाई प्रोफाइल' होने के कारण जांच की गति जानबूझकर धीमी रखी गई है।
• अब तक नहीं सौंपी गई रिपोर्ट: जांच अधिकारी द्वारा अब तक वरीय पदाधिकारियों को प्रतिवेदन (Report) नहीं सौंपा गया है, जिससे क्षेत्र में चर्चा है कि मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है।
प्रशासनिक रुख: 'रिपोर्ट का इंतजार'
जब इस संबंध में वन प्रमंडल पदाधिकारी हेमकांत झा से बात की गई, तो उन्होंने पारंपरिक जवाब देते हुए कहा: "जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। जैसे ही जांच अधिकारी काजल कुमारी द्वारा रिपोर्ट सौंपी जाएगी, दोषियों के खिलाफ अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
चर्चा का बाजार गर्म
सरकारी परिसर के भीतर से, जहां सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा की बात की जाती है, वहां से आधा दर्जन पेड़ काटकर ट्रैक्टरों पर लादकर ले जाना बिना किसी उच्चाधिकारी की मिलीभगत के संभव नहीं लगता। इलाके में यह चर्चा आम है कि "रक्षक ही भक्षक" बन गए हैं। अब सबकी नजरें काजल कुमारी की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं—क्या रिपोर्ट निष्पक्ष होगी या इसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया जाएगा?
-केवटी पत्रकारों की टोली
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