गीतांजलि इंटरनेशनल फाउंडेशन ने आयोजित किया 5वां संत शिरोमणि सूरदास महोत्सव

गीतांजलि इंटरनेशनल फाउंडेशन ने राजधानी दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के सीडी देशमुख ऑडिटोरियम में पांचवें सूरदास महोत्सव का भव्य आयोजन किया। यह आयोजन 16वीं सदी के महान संत शिरोमणि सूरदास को समर्पित था, जिसमें भारतीय शास्त्रीय नृत्य और संगीत के माध्यम से उनकी आध्यात्मिक और कलात्मक विरासत का प्रदर्शन किया गया। सूरदास महोत्सव का दिल्ली संस्करण कला प्रेमियों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया क्योंकि

यह महोत्सव ब्रज की माटी से जुड़ा आयोजन था और वर्षांत के मौके पर दिल्लीवासियों को ब्रज की माटी के प्रेमरस से सराबोर कर गया।

महोत्सव की शुरुआत प्रसिद्ध कथक गुरु विदुषी उमा डोगरा की शिष्याएं दीक्षा रावत और कार्तिका उन्नीकृष्णन की जोशीली और दिलकश प्रस्तुति से हुई। एनर्जी से भरपूर उनके मनमोहक प्रदर्शन ने दर्शकों का दिल जीत लिया।
 
इसके बाद रानी खानम ने अपनी मंत्रमुग्ध कर देने वाली एकल प्रस्तुति दी। उनके साथ तबले पर प्रांशु चतुर्लाल, वोकल पर जयवर्धन दाधीच, सारंगी पर नासिर खान, और पधंत पर निशा केसरी ने संगत की। रानी खानम ने सबसे पहले संत सूरदास के भावपूर्ण भजन 'सुंदर बदन सुख सदन श्याम को, निरख नयन मन थाक्यो से माहौल को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। यह रचना भगवान श्री कृष्ण की सुंदरता से मंत्रमुग्ध एक भक्त की कथा को दर्शाती है। इसके बाद उन्होंने ताल तीनताल में कथक की जीवंत प्रस्तुति दी, जिसमें टुकड़े, तिहाई, परन, लड़ी और जुगलबंदी का अद्भुत संगम था।  

इसके पश्चात भरतनाट्यम की प्रसिद्ध कलाकार रमा वैद्यनाथन ने एक पारंपरिक वर्णम पर आधारित अपनी एकल प्रस्तुति दी। उन्होंने श्रृंगार भक्ति के माध्यम से एक नायिका की भगवान विष्णु के प्रति प्रेम, तड़प और दिव्य संबंध को अपनी भावपूर्ण अभिव्यक्तियों से जीवंत कर दिया। महोत्सव का मुख्य आकर्षण रमा वैद्यनाथन और रानी खानम का एक विशेष युगल प्रदर्शन था। इसमें उन्होंने संत सूरदास की एक चंचल कविता पर अभिनय किया, जिसमें दो गोपियां तीसरी को भगवान कृष्ण की शरारतों से सावधान करती हैं। कलाकारों ने अपने भावपूर्ण नृत्य और कथा शैली से सूरदास की कविता के हास्य और भक्ति की गहराई को अत्यंत खूबसूरती से प्रस्तुत किया।  

महोत्सव की संस्थापक गीताांजलि शर्मा ने कहा, 'सूरदास महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि संत सूरदास की अनमोल भक्ति और ज्ञान को समर्पित एक सच्चा आदरांजलि है। संगीत और नृत्य की सार्वभौमिक भाषा के माध्यम से हम उनकी काव्य विरासत को भावी पीढ़ियों के करीब लाने का प्रयास करते हैं। यह महोत्सव भारत की आध्यात्मिक समृद्धि को मनाने और हमारी सांस्कृतिक जड़ों से गहरे जुड़ाव को प्रेरित करने का माध्यम है।'  
इस वर्ष का महोत्सव बेहद सफल रहा और यह गीतांजलि इंटरनेशनल फाउंडेशन की भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर को संरक्षित और बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को फिर से स्थापित कर गया।

महोत्सव का दूसरा चरण 6 जनवरी 2025 को मथुरा के सूरदास साधना स्थल पर आयोजित होगा, जिसमें भारतीय शास्त्रीय कला का एक और अद्भुत संगम देखने को मिलेगा।  


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